मोरवा. खेतों में फैल रही रंग बिरंगी पॉलीथिन के टुकड़े किसानों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. विभाग द्वारा पॉलीथिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाये जाने की बात कही जा रही है लेकिन इसका उपयोग उसी गति से बढ़ रहा है. खाद्य पदार्थ से लेकर कई सामनों की पैकिंग पॉलीथिन में होती है. लोग इसे इस्तेमाल कर यूं ही फेंक देते हैं. कचरा के रूप में यह खेतों में पहुंच जाता है. जानकार लोग बताते हैं कि यह खेंतों मेंवर्षों पड़ा रहता है. इससे खेतों की उर्वरा शक्ति नष्ट होने लगती है. घर एवं विद्यालय के आसपास के खेतों में फसल से ज्यादा पॉलीथिन ही नजर आते हैं. कई पशुओं की मौत पॉलीथिन निगलने से हो गयी है. आज कल बाजार से पॉलीथिन में सामान लाना फैशन सा हो गया है. लोग झोला का इस्तेमाल भूलने लगे हैं. पॉलीथिन का दुष्प्रभाव अब खेतों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है. बीज जमने से लेकर बीमारी तक सब में इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर लोग पॉलीथिन के जलाने का प्रयास करते हैं लेकिन इससे निकलने वाली तेज बदबूदार गंध से उनका हिम्मत जवाब देने लगता है. प्रखंड क्षेत्र में पॉलीथिन का दुष्प्रभाव महामारी की तरह फैल रहा है. अगर समय रहते इस पर नियंत्रण किया गया तो आने वाले समय में खेतों में फसल की जगह सिर्फ पॉलीथिन नजर आयेंगे. इसके लिए लोगों को जागरूक होना आवश्यक है ताकि इसे नासूर बनने से रोका जाये.
नासूर बन रहे पॉलीथिन के कचरे, किसान परेशान
मोरवा. खेतों में फैल रही रंग बिरंगी पॉलीथिन के टुकड़े किसानों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. विभाग द्वारा पॉलीथिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाये जाने की बात कही जा रही है लेकिन इसका उपयोग उसी गति से बढ़ रहा है. खाद्य पदार्थ से लेकर कई सामनों की पैकिंग पॉलीथिन में होती है. लोग […]
