सदर अस्पताल में बर्न केस आने के बाद लचर व्यवस्था की खुली पोल
समस्तीपुर : सरकारी स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने का विभाग चाहे जितना दावा कर ले, लेकिन जरुरतमंदों को समय पर उसका लाभ नहीं मिल पाता है. समस्तीपुर जिले में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है जो बुधवार की देर रात उस समय देखने को मिली जब एक साथ चार-चार बर्न केस को इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए भर्ती कराया गया.
विभूतिपुर थाना क्षेत्र के पंडित टोल टभका गांव से दो महिला समेत चार गंभीर रूप से झुलसे हुए लोगों को सदर अस्पताल लाया गया था़ लेकिन गंभीर रूप से झुलसे हुए उन मरीजों के समुचित इलाज के लिए सदर अस्पताल में न तो संसाधन उपलब्ध थे और न ही दवा की पूरी व्यवस्था थी. इमरजेंसी वार्ड के बेड पर आग से झुलसे युवक को ऐसे चादर में लपेट कर मरनासन्न स्थिति में ऐसे छोड़ दिया गया था. जैसे उसे अब दवा-दारू की जरूरत ही न हो.
रात में नहीं मिला एक भी एंबुलेंस : सदर अस्पताल में बुधवार की रात एक भी सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं था. टॉल फ्री नंबर पर मरीज के परिजन एंबुलेंस की मांग कर रहे थे तो फोन उधर से बार-बार काट दिया जा रहा था़ परिसर में सिर्फ कुछ निजी एंबुलेंस खड़ी थीं लेकिन उसके चालक भी गरीब मरीजों को देखकर सामने नहीं आ रहे थे. अस्पताल सूत्रों की मानें तो सरकारी एंबुलेंस को चुनाव कार्य के इवेंट कॉल के लिए रिजर्व रखा गया था.
