दुस्साहस. शराब माफियाअों से पुिलस की मुठभेड़ का मामला
सरायरंजन : सोमवार की रात शराब लदी कार का पीछा करते हुए डीआइयू की टीम व सरायरंजन पुलिस इंद्रवारा पहुंची थी, तो पुलिस से घिरता देख कर कार से नीचे उतर कर एक अपराधी ने ऑटोमैटिक राइफल से अंधाधुध फायरिंग शुरू कर दी. बीएमपी जवान की मौत व थानाध्यक्ष के घायल होने के बाद अपराधियों ने अपनी कार से घायल पुलिसकर्मियों को कुचल कर मारने की भी कोशिश की थी. लेकिन, पुलिस वाहन के चालक ने तत्परता दिखाते हुए कार में जबरदस्त तरीके से ठोकर मार दी.
सादे ड्रेस में थे पुलिसकर्मी : अपराधियों को पकड़ने आये पुलिस के जवान सादे ड्रेस में थे. लोगों का कहना है कि पुलिस की वर्दी से ही उनकी पहचान होती है. ऐसी आशंका जतायी जा रही है न पुलिस के ड्रेस में पुलिस के जवान थे और न ही पुलिस की गाड़ी ही थी.
दोनों गाड़ी बोलेरो थी. एसपी ने भी इस बात को गंभीरता से लिया और पुलिस वालों को खूब खरी-खोटी सुनायी है.
पुलिस में दिखी समन्वय की कमी : इस घटना से एक बात खुलकर सामने आ रही है कि स्थानीय पुलिस से तालमेल में कमी थी. कहा जा रहा है कि जब पुलिस को काफी पहले ही सूचना मिल गयी थी कि अपराधी हथियार से लैस होकर शराब के साथ हलई ओपी के रास्ते आ रहे हैं, इसके बाद भी स्थानीय पुलिस से मदद नहीं ली गयी.
हलई ओपी अध्यक्ष रंजीत कुमार का कहना है कि अगर जरा सी भी भनक दी जाती तो पंसलवा चौक से लेकर केवल स्थान तक कई जगहों पर पुलिस जांच करती व बहुत संभव था कि अपराधी समय रहते गिरफ्त में आ जाते.
ओपी के इतिहास में पहली घटना : मोरवा के हलई ओपी की स्थापना के 38 वर्ष हो चुके हैं. इतिहास में यह पहली घटना है जब पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी हुई है. पहली बार पुलिस के किसी जवान को आपराधिक वारदात में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है.
