सरायरंजन : नशा जीवन को तबाह कर देता है. चाहे वह जिसका हो. हरेंद्र के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसे शुरू से जुआ खेलने का नशा था. अब उसकी मौत के बाद यह सवाल परिजनों को कौंधने लगा है कि आखिर किसके सहारे कटेगा दो मासूमों की जिंदगी. जिसने अभी अपने पिता का ठीक से चेहरा भी नहीं देखा है उसका जीवन कैसे गुजरेगा.
उसकी पत्नी खुशबू अपने पति की मौत से व्याकुल होकर होश खो बैठी है. हरेंद्र को पता भी नहीं होगा कि शुक्रवार की रात उसकी आखिरी रात होगी. उसकी शादी महज चार साल पूर्व हुई थी. हरेंद्र को दो पुत्र हैं जिसमें एक दो साल का है. वहीं दूसरी 15 दिन का है. हरेंद्र घर पर ही रहकर मजदूरी करता था और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था. शुक्रवार की शाम अपने घर से दोस्तों के साथ जुआ खेलने के लिए निकला था.
शनिवार की सुबह हरेंद्र की लाश उसके घर पहुंची. इसको देख घर के लोग अवाक रह गये. देखते ही देखते लोगों के मुंह से करुण क्रंदन की आवाज गूंजने लगी. यह कठोरदिल इंसान को भावविभोर कर रख दिया. हरेंद्र पत्नी की स्थित काफी नाजुक है, पुत्र अपने पिता के आने की आस में घर के दरवाजे पर बैठा है. वहीं उसके पिता मुनेश्वर पासवान, मां व भाई का भी रो-रो कर बुरा हाल है. इस घटना से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है.
