बालू का काला कारोबार जोरों पर, चार माह में 300 फीसदी बढ़ी कीमत
समस्तीपुर : जिले में बालू का काला कारोबार जोरों पर चल रहा है.सोना चांदी से भी तेज बालू की बढी कीमतों ने कालाबाजारियों की तिजोरी तेजी से भर दी है. न तो जीएसटी का झमेला और न बिलिंग की जरुरत, पूरा करोबार ही सिर्फ चिरकुट पर चल रहा है. प्रशासन के नाक के नीचे लोगों […]
समस्तीपुर : जिले में बालू का काला कारोबार जोरों पर चल रहा है.सोना चांदी से भी तेज बालू की बढी कीमतों ने कालाबाजारियों की तिजोरी तेजी से भर दी है. न तो जीएसटी का झमेला और न बिलिंग की जरुरत, पूरा करोबार ही सिर्फ चिरकुट पर चल रहा है. प्रशासन के नाक के नीचे लोगों से बालू की बढी कीमतें वसूली जा रही है.
विगत चार माह में बालू की कीमतों में 300 फीसदी से तेज इजाफा दर्ज किया गया है. ऐसे में रात ढलते ही जमालपुर व कोइलवर से बालू की बड़ी खेप जिले में मंगायी जा रही है. मगर बालू की कीमतें नहीं गिर रही है. व्यापारी जहां बालू की कीमतों में इजाफा के लिये खनन पर रोक के फैसले को कारण बता रहे हैं. वहीं कीमतों के कारण निर्माण उद्योग का कारोबार चौपट हो गया है. दीपावली जैसे अवसर पर भी मजदूर रोजी रोटी के लिये भटक रहे हैं.
एक ट्रक की कीमत 36 हजार रुपये तक पहुंची
जिले में एक ट्रक बालू की कीमत 36 हजार तक पहुंच चुकी है. एनजीटी के बालू खनन पर रोक से पहले एक ट्रक बालू की कीमत 12 हजार तक होती थी. औसतन एक ट्रक बालू में 500 सीएफटी बालू होती है. बताते चलें कि नेशनल ग्रीन ट्रेब्युनल ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक बालू खनन पर रोक लगायी हुयी थी. जिले में बालू के कारोबार से 100 से अधिक कारोबारी जुड़े हुए हैं. अधिकांश बालू जमालपुर व कोइलवर से मंगायी जाती है. बूढी गंडक का सफेद बालू निर्माण कार्यों में बेहतर गुणवत्ता का नहीं माना जाता है.
कारोबार पर नहीं थी नियंत्रण की व्यवस्था
खनन विभाग की मानें तो पुराने नियमों में बालू के कारोबार पर स्थानीय नियंत्रण की व्यवस्था नहीं थी. बालू का उठाव होता था और कारोबारी इसकी सीधे बिक्री करते थे. खनन विभाग को न तो बिक्री पर नजर रख सकता था और न ही करोबारियों की कोई सूची ही विभाग के पास उपलब्ध नहीं थी. जिला खनन पदाधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि नये नियमों के मुताबिक अब डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बालू कारोबार पर नजर रख सकेगी. इसके लिये 2 नवंबर को प्रशासनिक के साथ ही पुलिस पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गयी है. जिसमें अवैध करोबार के रोक पर कोई अहम फैसला हो सकता है.
करोबारियों ने बंदोबस्ती प्रथा का किया विरोध
नये नियमों में बालू के कारोबार के लिये प्रशासन स्तर से बंदोबस्ती की जायेगी. सरकार के निर्धारित दर पर बालू की बिक्री की जायेगी. वहीं कारोबारियों ने इसका विरोध किया है. इस बाबत बारह पत्थर के कारोबारी सुजीत कुमार व प्रमोद कुमार चौधरी ने कहा कि बालू की कीमतों के कारण कारोबार धड़ाम से गिर गया. 70 फीसदी कारोबार चौपट हो चुका है. बालू नहीं रहने के कारण न तो सिमेंट और न ही स्टोन चिप्स की बिक्री ही हो रही है. नये नियमों के कारण कारोबारियों को और समस्या ही होगी.बालू उठाने के लिये मजदूर लगते हैं. ऐसे में इसके खर्च को कौन जोड़ेगा.