समस्तीपुर : सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने अगस्त महीने के लिए तैयार की गयी ड्यूटी रोस्टर को खारिज कर दिया है. साथ ही अपने स्तर से रोस्टर तैयार कर उस पर अस्पताल के चिकित्सकों की सहमति ली जा रही है. अस्पताल प्रशासन के संज्ञान में मामला आते ही इस मुद्दे को लेकर डीएस व डॉक्टरों में ठन गयी है. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ अमरेंद्र कुमार शाही इसे प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप बता कर डॉक्टरों के द्वारा तैयार रोस्टर को खारिज कर रहे हैं.
इससे मामला आमने-सामने का हो गया है. जानकारी के अनुसार, प्रत्येक महीने की तरह अस्पताल प्रशासन ने अगस्त महीने के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर तैयार किया. इस पर सिविल सर्जन ने भी अपनी सहमति दे रखी है. इस बीच मामला संज्ञान में आते ही अस्पताल के डॉक्टरों ने नये रोस्टर का यह कहकर विरोध जताना शुरू कर दिया है कि इसमें एकरूपता का अभाव है. अस्पताल प्रशासन की ओर से भेदभावपूर्ण ड्यूटी रोस्टर तैयार की गयी है. इसे चिकित्सक नहीं मानेंगे. चिकित्सकों का कहना है कि डीएस के द्वारा चिपकायी गयी रोस्टर में चिकित्सकों की सुविधा का ख्याल नहीं रखा गया है.
कुछ डॉक्टरों को कम ड्यूटी आवंटित की गयी है, जबकि कुछ डॉक्टरों पर ड्यूटी का बोझ लाद दिया गया है. ऐसे में वे काम कर पाने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे हैं. इसी के कारण डॉक्टरों ने डीएस के रोस्टर को मानने से इनकार कर दिया है. साथ ही आपसी सहमति से नया रोस्टर तैयार कर उस पर सदर अस्पताल के डॉक्टरों की सहमति ली जा रही है. इसी के आधार पर वे ड्यूटी भी करेंगे. सदर अस्पताल एफआरयू के सर्जन सह भाषा के जिला सचिव डाॅ एबी सहाय ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को संतुलित ड्यूटी का वितरण करना चाहिए. डॉक्टर उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं करने पर आमदा हैं. इस कारण डॉक्टरों ने अपने स्तर से रोस्टर तैयार कर उस पर काम करने का निर्णय लिया है.
इधर, संपर्क करने पर सदर अस्पताल के डीएस डॉ शाही ने कहा कि अस्पताल को चलाने की जिम्मेदारी उनकी है. इसलिए उन्होंने अपनी सूझबूझ से रोगियों के हित का ख्याल करते हुए ड्यूटी का वितरण किया है. इसमें कहीं कोई असमानता नहीं है. यदि डॉक्टर अस्पताल प्रशासन के रोस्टर के अनुरूप ड्यूटी नहीं करेंगे, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों को लिखा जायेगा. जरूरत पड़ी तो उन्हें अनुपस्थित करार देते हुए वेतन बंद करने की दिशा में भी कदम उठाया जा सकता है.
