नियति का क्रूर प्रहार, पिता की तरह पुत्र की भी ताड़ के पेड़ से गिरकर हुई मौत

सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में शनिवार शाम ताड़ के पेड़ से गिरकर 34 वर्षीय राजेश चौधरी की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. हृदयविदारक बात यह है कि छह वर्ष पूर्व मृतक के पिता की भी मौत इसी तरह पेड़ से गिरने के कारण हुई थी, जिससे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है.

सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) से आयुष की रिपोर्ट: बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के चौधरी टोला वार्ड संख्या 22 में शनिवार की शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ. ताड़ के पेड़ से गिरकर एक 34 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई. मृतक की पहचान आजाद नगर निवासी स्वर्गीय विंदा चौधरी के पुत्र राजेश चौधरी के रूप में हुई है. इस घटना ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि छह साल पुराने जख्मों को भी हरा कर दिया है.

नीरा उतारने के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, राजेश चौधरी शनिवार शाम ताड़ के पेड़ पर नीरा उतारने के लिए चढ़ा था. इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह काफी ऊंचाई से अनियंत्रित होकर सीधे जमीन पर आ गिरा. जमीन पर गिरते ही वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया. आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने आनन-फानन में उसे सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे सदर अस्पताल सहरसा रेफर कर दिया. सहरसा में इलाज के दौरान राजेश ने दम तोड़ दिया.

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता की भी ऐसे ही हुई थी मौत

राजेश की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया. ग्रामीणों ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि मृतक के पिता विंदा चौधरी की मौत भी करीब छह वर्ष पूर्व इसी तरह पेड़ से गिरने के कारण हुई थी. पिता के बाद अब पुत्र की भी उसी अंदाज में हुई आकस्मिक मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है. राजेश ही अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, जो मेहनत-मजदूरी कर घर चलाता था. उसकी मौत से परिजनों के सामने अब जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है.

गांव में पसरा मातमी सन्नाटा

इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे चौधरी टोला में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. ग्रामीणों ने बताया कि राजेश एक मिलनसार और मेहनती युवक था. एक ही परिवार में एक ही तरह के हादसे में पिता और पुत्र की जान जाने की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव का हर शख्स इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहा है.

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By Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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