सहरसा जिले में थैलेसीमिया जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. जिले में 60 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से कई बच्चों की समय पर समुचित इलाज और आवश्यक संसाधनों के अभाव में असमय मौत भी हो चुकी है. इस स्थिति से पीड़ित परिवारों में भारी निराशा और चिंता का माहौल है.
सदर अस्पताल में 'थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर' की मांग
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के परिजनों और सामाजिक संस्थाओं ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से त्वरित कदम उठाने की मांग की है:
- एकीकृत सुविधा: सदर अस्पताल परिसर में जल्द से जल्द 'थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर' स्थापित किया जाए, ताकि बच्चों को नियमित और सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाने) की सुविधा एक ही स्थान पर आसानी से मिल सके.
- निजी ब्लड बैंकों में कोटा: निजी रक्त केंद्रों (Private Blood Banks) पर भी थैलेसीमिया मरीजों के लिए पर्याप्त रक्त की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए.
पटना से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, दूर हो बार-बार जाने का झंझट
श्री शंकर बाबू स्मृति सेवा फाउंडेशन के निदेशक गणेश कुमार भगत ने स्वास्थ्य विभाग के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं:
फाउंडेशन के निदेशक गणेश कुमार भगत की मांग: "पटना से विशेषज्ञ डॉक्टरों (हेमेटोलॉजिस्ट) की टीम को हर महीने कम से कम एक दिन सहरसा सदर अस्पताल भेजा जाना चाहिए. इससे स्थानीय स्तर पर ही थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की गहन जांच और परामर्श मिल सकेगा, और गरीब परिजनों को बार-बार पटना का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा."
अस्पताल में नहीं मिल रही असरदार दवा, महंगी खरीद की मजबूरी
थैलेसीमिया मरीजों को बार-बार रक्त चढ़ाने के कारण शरीर में आयरन की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए आयरन चिलेशन (Iron Chelation) दवाओं की नियमित आवश्यकता होती है:
- बाजार की महंगी दवाएं: वर्तमान में सदर अस्पताल में ये असरदार दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे परिजनों को खुले बाजार से काफी महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं.
- आर्थिक तंगी: गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर इसका भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है. संस्था ने सरकार से मांग की है कि बाजार में मिलने वाली असरदार आयरन चिलेशन दवाएं सदर अस्पताल में मुफ्त और नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं.
स्वास्थ्य विभाग से मांग की गई है कि जिले में थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों के लिए रक्त, दवा और विशेषज्ञ इलाज की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि संसाधनों और पैसों के अभाव में किसी मासूम की जान न जाए.
