सहरसा के सावन महोत्सव में दिखा मिथिला की लोक संस्कृति का रंग, जट-जटिन और कजरी ने बांधा समां

सहरसा के कायस्थ टोला में आयोजित सावन महोत्सव में मिथिला की लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला. जट-जटिन की लोकगाथा, कजरी और राखी गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह आयोजन मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक सफल प्रयास रहा.

Saharsa News: सहरसा में सावन का महीना और मिथिला की लोक संस्कृति. दोनों का मेल बुधवार को सहरसा के कायस्थ टोला स्थित नन्द कुलेन्द्र कला वाटिका परिसर में देखने को मिला. यहां आयोजित सावन महोत्सव में गीत, संगीत, लोकगाथा और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह मिथिलामय बना दिया.

मिथिला की कला-संस्कृति और पारंपरिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से मिथिला के धिया की ओर से आयोजित इस महोत्सव में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए पुरानी लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया. कार्यक्रम में जट-जटिन की लोकगाथा से लेकर कजरी और राखी गीतों तक की प्रस्तुति हुई. दर्शक कभी लोक संस्कृति की गंभीरता से जुड़े, तो कभी हास्य और मनोरंजन से खिलखिला उठे.

दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ सावन महोत्सव

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ गिरधारी कुमार श्रीवास्तव पुटीस और श्रीमती रेणु श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलित कर किया. इसके साथ ही परिसर में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ.

आयोजकों का उद्देश्य सिर्फ सावन के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम करना नहीं था, बल्कि मिथिला की उन लोक परंपराओं को लोगों के सामने लाना भी था, जो बदलते समय के साथ धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं.

जट-जटिन ने सुनाई मिथिला की लोकगाथा

महोत्सव का खास आकर्षण जट-जटिन की प्रस्तुति रही. कलाकारों ने पारंपरिक लोकगाथा को मंच पर प्रस्तुत कर दर्शकों को मिथिला की लोक परंपरा से रूबरू कराया.

जट-जटिन जैसी लोक प्रस्तुतियां मिथिला की सामाजिक और सांस्कृतिक स्मृतियों से जुड़ी रही हैं. मंच पर इसकी प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी लोक जड़ों की याद दिलायी.

श्याम चूड़ी बेचने वाला रोल प्ले ने खूब गुदगुदाया

कार्यक्रम में श्याम चूड़ी बेचने वाला रोल प्ले भी प्रस्तुत किया गया. इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में हास्य और मनोरंजन का रंग भर दिया.

कलाकारों के अभिनय और संवाद पर दर्शकों ने खूब तालियां बजायीं. गंभीर लोक परंपराओं के बीच हास्य से भरपूर इस प्रस्तुति ने महोत्सव का माहौल और जीवंत कर दिया.

कजरी और राखी गीतों से जीवंत हुआ सावन

सावन की लोक भावना को कजरी और राखी गीतों की प्रस्तुति ने और गहरा कर दिया. गीतों के जरिए सावन की उमंग, रिश्तों की मिठास और मिथिला की पारंपरिक सांस्कृतिक संवेदना को सामने रखा गया.

कलाकारों की प्रस्तुतियों पर मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया. बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है लोक संस्कृति

आयोजकों ने कहा कि बदलते समय में लोक कला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है. आधुनिक जीवनशैली के बीच लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक लोकगाथाएं धीरे-धीरे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से दूर होती जा रही हैं.

ऐसे आयोजनों के जरिए मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

आयोजकों के अनुसार, संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं है. उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी समाज की जिम्मेदारी है. सावन महोत्सव इसी सोच के साथ आयोजित किया गया.

Saharsa News: आयोजन में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम के सफल आयोजन में वेदवती, अनामिका कुमारी, कुमारी नीलू, रंजू और दीपमाला की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

पूरे कार्यक्रम के दौरान गीत-संगीत, लोकगाथाओं और पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए मिथिला की संस्कृति का रंग दिखाई दिया. सावन की उमंग के बीच आयोजित इस महोत्सव ने लोगों को मनोरंजन के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी दिया.

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By Vinay Kumar Mishra

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