सहरसा के वित्त अनुदानित कॉलेजों का होगा अधिग्रहण? विधायक आइपी गुप्ता बोले- सदन में मजबूती से उठाएंगे सवाल

सहरसा के पुराने वित्त अनुदानित कॉलेजों के भविष्य को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है. विधायक आइपी गुप्ता ने आश्वासन दिया है कि वह महाविद्यालयों से जुड़ी समस्याओं को सदन में मजबूती से उठाएंगे. शिक्षकों और कर्मचारियों के लंबे संघर्ष के बाद कॉलेजों के अधिग्रहण की मांग प्रमुखता से सामने आई है.

Saharsa News: सहरसा के पुराने वित्त अनुदानित महाविद्यालयों के भविष्य को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है. बनवारी शंकर महाविद्यालय, सिमराहा में बुधवार को आयोजित सम्मान समारोह में वित्त अनुदानित कॉलेजों के अधिग्रहण का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया. सहरसा सदर विधायक एवं जनप्रतिनिधि सदस्य आइपी गुप्ता ने भरोसा दिया कि महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जुड़ी समस्याओं को वह सदन में मजबूती से उठाएंगे.

मामला सिर्फ किसी एक कॉलेज का नहीं है. लंबे समय से वित्त अनुदानित महाविद्यालयों में काम कर रहे शिक्षक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं. कई शिक्षक इस दौरान सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं. ऐसे में पुराने कॉलेजों के अधिग्रहण की मांग फिर चर्चा में आ गयी है.

विधायक बोले- सम्मान छात्र के रूप में मिलना चाहिए

सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि विधायक आइपी गुप्ता ने कहा कि डिग्री महाविद्यालय में उनका सम्मान विधायक के रूप में नहीं, बल्कि एक छात्र के रूप में होना चाहिए. उन्होंने कहा कि वह इस सम्मान को आशीर्वाद के रूप में स्वीकार कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि जब देश के बड़े सदन में जाने का मौका मिलेगा तो वहां शिक्षक और रक्षक को सबसे अधिक वेतन देने की बात रखेंगे.

विधायक ने महाविद्यालय की स्थापना के समय मार्गदर्शक की भूमिका निभाने वाले लोगों के योगदान की भी सराहना की.

जाति-धर्म से ऊपर उठकर विकास की जरूरत

विधायक ने सहरसा के विकास को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सहरसा के बारे में ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने के दौरान उन्हें यह समझने का प्रयास किया कि विश्वविद्यालय और दूसरी संस्थाएं यहां से दूसरी जगह क्यों चली गयीं.

उनका कहना था कि लोग जाति और धर्म के नाम पर लड़ते हैं, जबकि विकास की लड़ाई में पीछे रह जाते हैं. उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दों पर लोगों को एकजुट होकर आगे आने की जरूरत है.

वित्त अनुदानित महाविद्यालयों की समस्याओं को लेकर उन्होंने सदन में बेझिझक आवाज उठाने का भरोसा दिया.

पुराने कॉलेजों के अधिग्रहण की उठी मांग

पूर्व विधायक एवं विशिष्ट अतिथि अरुण कुमार ने कहा कि सिमराहा के किसान परिवारों ने गरीबी के बावजूद अपनी जमीन देकर शिक्षण संस्थान को खड़ा करने में योगदान दिया. उन्होंने ऐसे परिवारों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन करने की बात कही.

उन्होंने कहा कि वित्त अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने लंबे समय तक संघर्ष किया है. इस दौरान कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं. सरकार को ऐसे महाविद्यालयों के अधिग्रहण की दिशा में पहल करनी चाहिए.

211 नये कॉलेजों के साथ पुराने संस्थानों पर भी ध्यान देने की मांग

विशिष्ट अतिथि डॉ पवन कुमार यादव ने कहा कि सरकार ने 211 नये डिग्री महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है, जिसके लिए सरकार धन्यवाद की पात्र है.

हालांकि उन्होंने कहा कि जिन पुराने महाविद्यालयों के पास पहले से जमीन, भवन और कर्मचारी उपलब्ध हैं, उनके अधिग्रहण पर भी सरकार को विचार करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सदन में सहरसा के विधायक मजबूती से उठा सकते हैं.

हजारों छात्र यहां कर रहे पढ़ाई

राजद के वरिष्ठ नेता रंजीत कुमार ने कहा कि जिस उद्देश्य से महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी, वह आज काफी हद तक सफल हो रहा है. महाविद्यालय में हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.

उन्होंने महाविद्यालय से अपने भावनात्मक जुड़ाव की बात भी कही. कार्यक्रम में वक्ताओं ने वित्त रहित शिक्षा नीति के खिलाफ चल रही लड़ाई में मुखर होकर साथ देने की बात कही.

Saharsa News: संस्थापकों के योगदान को किया याद

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ योगेंद्र कुमार ने की, जबकि संचालन प्रो हरि नारायण यादव ने किया.

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए महाविद्यालय के सचिव प्रो कमलेश्वरी प्रसाद यादव ने कहा कि जिन चार लोगों ने महाविद्यालय की स्थापना का सपना देखा था, वे आज उनके बीच नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जहां भी होंगे, महाविद्यालय के वर्तमान स्वरूप को देखकर संतुष्ट होंगे.

उन्होंने वित्त रहित शिक्षा नीति के खिलाफ चले आंदोलनों और महाविद्यालय की स्थापना के दौर की पुरानी यादें भी साझा कीं. साथ ही स्थानीय विधायक से महाविद्यालय के प्रति सहयोग और संरक्षण जारी रखने का आग्रह किया.

कार्यक्रम को आइआइपी पार्टी के जिलाध्यक्ष विद्यानंद शर्मा, टुनटुन शर्मा, राजद की वरिष्ठ नेत्री प्रो गीता यादव, माले नेता कुंदन कुमार सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया.

मौके पर प्रो शिवनारायण यादव, प्रो योगेंद्र कुमार, प्रो जयप्रकाश झा, प्रो उमेश कुमार, डॉ अरविंद कुमार झा, डॉ गजेंद्र कुमार, डॉ दीपक कुमार सिंह, प्रो नूतन कुमारी, प्रो भारती झा, प्रो धर्मशिला कुमारी, प्रधान लिपिक संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी मौजूद रहे.

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By Vinay Kumar Mishra

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