सहरसा. भाजपा की प्रदेश महामंत्री लाजवंती झा ने कहा कि इतिहास सिर्फ तारीख से नहीं फैसलों से लिखे जाते हैं. कुछ फैसले सालों तक टाले गये. महिला आरक्षण बिल उन में से एक है. उन्होंने कहा कि पहले वादे हुए, बहस हुई, समर्थन भी मिला, लेकिन नतीजा शून्य रहा. 1996 में पहली बार बिल आया, लेकिन हंगामें में अटक गया. फिर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 1998, 1999, 2003 में बार-बार कोशिश की गयी. लेकिन हर बार हंगामा, रुकावट, देरी से बिल रूका रहा. 2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के पास समय भी था एवं बहुमत भी. 2010 में राज्यसभा में बिल पास हुआ, लगा अब रास्ता साफ है. लेकिन लोकसभा में कभी लाया ही नहीं गया. साल बीतते गये, महिलाएं इंतजार करती रही. बातें बहुत हुई लेकिन फैसला कभी नहीं हुआ. फिर सितंबर 2023 में मोदी के नेतृत्व में 30 साल का इंतजार खत्म हुआ. नारी शक्ति वंदन अधिनियम दोनों सदनों में पास हो गया. भारत के लोकतंत्र को नई ऊर्जा देने वाला एक ऐतिहासिक फैसला 16 अप्रैल को साकार होने जा रहा है. यह वह क्षण है, जब नारी शक्ति निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में अधिक सशक्त रूप से स्थापित होगी. नेतृत्व में यह पहल महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भागीदारी का अवसर देगी. नारीशक्ति का सशक्तिकरण ही विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला है. आज भारत को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं को आगे आना आवश्यक है. महिलाओं की आवाज मजबूत होगी, तब भारत का लोकतंत्र और अधिक संतुलित, संवेदनशील एवं समावेशी बनेगा. जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभाती है तो केवल प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ता बल्कि सोच एवं दृष्टिकोण भी बदलता है. समाज, नीति एवं विकास तीनों को नयी दिशा मिलती है. यही एक सशक्त एवं प्रगतिशील राष्ट्र की पहचान है. भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. यह वह क्षण है जब महिलाओं की बढ़ती भागीदारी शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदाई, समावेशी एवं मजबूत बनायेगी. राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान, महिलाओं का नीति निर्धारण में सहभागिता एवं महिला आधारित विकास की यह नयी अध्याय आने वाले समय में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम राष्ट्र निर्माण में मिल का पत्थर: लाजवंती झा
नारी शक्ति वंदन अधिनियम राष्ट्र निर्माण में मिल का पत्थर: लाजवंती झा
