केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) में पहली बार मैथिली भाषा को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने से संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा सितंबर में आयोजित होने वाली आगामी सीटेट परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें अब परीक्षार्थी मैथिली भाषा का चयन कर सकेंगे.
भाषाई पहचान के लिए ऐतिहासिक कदम
ज्ञात हो कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बावजूद मैथिली को अब तक सीटेट की परीक्षा में स्थान नहीं मिला था. अधिकांश अन्य अनुसूचित भाषाओं में यह परीक्षा पहले से आयोजित होती रही है. शिक्षाविद दिलीप कुमार चौधरी ने बोर्ड के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मिथिला की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई मजबूती प्रदान करेगी.
लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता
श्री चौधरी ने बताया कि वे स्वयं कई वर्षों से समाचार पत्रों, सोशल मीडिया और विभिन्न बौद्धिक मंचों के माध्यम से इस मांग को उठाते रहे हैं. उन्होंने जनप्रतिनिधियों और सरकार का ध्यान लगातार इस भाषाई भेदभाव की ओर आकर्षित किया था. उन्होंने मैथिली को सीटेट में शामिल करने की इस पहल के लिए सांसद गोपाल जी ठाकुर के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी.
अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी ध्यान देने की मांग
मैथिली के सीटेट में शामिल होने पर हर्ष जताते हुए श्री चौधरी ने मिथिला से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों को भी साझा किया. उन्होंने मैथिली भाषा के लिए अलग दूरदर्शन (DD) चैनल, इसे शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने, चुनाव प्रचार में मैथिली के उपयोग और ‘मिथिला विद्वत परिषद’ की स्थापना जैसे मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा है. मिथिला के विद्वानों का मानना है कि इस निर्णय से बिहार और विशेषकर मिथिलांचल के उन अभ्यर्थियों को बड़ा लाभ होगा, जो अपनी मातृभाषा में परीक्षा देकर शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं.
