सहरसा नगर निगम क्षेत्र स्थित गायत्री शक्तिपीठ में सेवा, शिक्षा एवं संस्कार को समर्पित एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. इस विशेष अवसर पर क्षेत्र में संचालित विभिन्न बाल संस्कार शालाओं में अध्ययनरत बच्चों के बीच सम्मानित अतिथियों द्वारा शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वंचित और सामान्य वर्ग के बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना एवं उनके बेहतर भविष्य के निर्माण में सहयोग प्रदान करना था.
शिक्षा और संस्कार से ही संभव है उज्ज्वल भविष्य
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजें उपहार स्वरूप प्रदान की गईं. वितरण के क्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को नोटबुक, पेन, पेंसिल, ज्यामितीय बॉक्स और पेंटिंग बॉक्स सहित अन्य उपयोगी सामग्री दी गई. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गायत्री शक्तिपीठ के ट्रस्टी अरुण कुमार जायसवाल ने कहा कि इस तरह की पहल से बच्चों में शिक्षा के प्रति ललक बढ़ती है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार और शिक्षा के सही तालमेल के साथ ही एक सशक्त व सभ्य समाज का निर्माण संभव है.
अंतरराष्ट्रीय अतिथियों ने झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को बांटी सामग्री
इस शैक्षणिक कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की मौजूदगी ने बच्चों के उत्साह को दोगुना कर दिया. मस्कट (ओमान) से पधारे मेहुल एंटरप्राइजेज के सीईओ हुसैन सईद अली अल राहबी, इंजीनियर सुमित मुदगिल और वनश्री ने विशेष अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में शिरकत की. सभी अतिथियों ने गायत्री परिवार द्वारा सहरसा में समाज सेवा एवं संस्कार के क्षेत्र में किए जा रहे जमीनी स्तर के कार्यों की जमकर सराहना की. ओमान से आए अतिथियों ने झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों के बीच अपने साथ लाई गई शैक्षणिक सामग्री का वितरण कर उनका हौसला बढ़ाया.
समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने की सराहनीय पहल
विदेशी अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री शक्तिपीठ का यह प्रयास शिक्षा, संस्कार और सेवा के पुनीत संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है. उनका मानना था कि ऐसे आयोजनों से समाज के हर तबके को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलती है. इस अवसर पर कार्यक्रम के सफल संचालन में गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता, बाल संस्कार शालाओं के शिक्षक और बड़ी संख्या में बच्चे व उनके अभिभावक मौजूद रहे.
