Electronic Interlocking Sahrsa Mansi Rail Section: सहरसा में अब रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के संचालन के लिए पुराने पैनल और उसके बटनों पर निर्भरता खत्म होने जा रही है. सहरसा-मानसी रेलखंड समेत समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर जल्द ही सिग्नलिंग व्यवस्था का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी है. यहां पैनल सिस्टम की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग यानी ईआई सिस्टम लगाया जायेगा. इसके बाद ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी गतिविधियां स्क्रीन पर दिखाई देंगी और माउस के जरिए ऑपरेशन किया जायेगा.
भारतीय रेलवे ने इस बड़े बदलाव के लिए 233 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है. वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद अब टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. रेलवे ने वर्ष 2027 तक ईआई वर्क पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
इस बदलाव का असर सिर्फ रेलवे कर्मचारियों के काम करने के तरीके तक सीमित नहीं रहेगा. आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से ट्रेनों की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा, तकनीकी बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी और भविष्य में कवच जैसी आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के कार्यान्वयन का रास्ता भी मजबूत होगा.
21 स्टेशनों पर बदलेगी सिग्नलिंग की तस्वीर
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के लिए समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों का चयन किया गया है. इनमें सिमरी बख्तियारपुर, कोपरिया, बदला घाट, धमारा घाट, मधुबनी, अंगार घाट, रुसेरा घाट, रामगढ़वा, भगवानपुर देसुआ, नरहन, नया नगर, राजनगर, सलौना, इमली, ओलापुर, सोनबरसा कचहरी, पंडौल, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह नगर गढ़पुरा, बैजनाथपुर, बुधमा और मुरलीगंज शामिल हैं.
सहरसा-मानसी रेलखंड के यात्रियों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिग्नलिंग सिस्टम सीधे ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारु परिचालन से जुड़ा होता है. सिस्टम के आधुनिक होने से परिचालन क्षमता और ट्रेनों की गति बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
पैनल के बटन गायब, दो स्क्रीन पर दिखेगी ट्रेन की स्थिति
अभी इन स्टेशनों पर सिग्नलिंग और ट्रेन परिचालन से जुड़े काम पैनल सिस्टम के जरिए किये जाते हैं. इस व्यवस्था में अलग-अलग बटन के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लागू होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल जायेगी.
नई व्यवस्था में प्रत्येक स्टेशन पर दो-दो स्क्रीन लगायी जायेंगी. पैनल के बटन की जगह स्क्रीन पर माउस के माध्यम से ऑपरेशन किया जायेगा. स्टेशन मैनेजर, स्टेशन अधीक्षक और ऑपरेटिंग विभाग के कर्मचारियों को सेक्शन में ट्रेनों की गति, स्थिति और परिचालन से जुड़ी जानकारी लगातार मिलती रहेगी.
यानी किसी ट्रेन की स्थिति समझने और परिचालन से जुड़े ऑपरेशन के लिए कर्मचारियों को पुराने पैनल सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना होगा. स्क्रीन आधारित सिस्टम में सूचनाएं अधिक आधुनिक तरीके से उपलब्ध होंगी.
बटन में खराबी से ट्रेन रोकने की नौबत होगी कम
पुराने पैनल सिस्टम में कभी-कभी बटन या अन्य तकनीकी खराबी के कारण सिग्नलिंग व्यवस्था प्रभावित हो जाती है. ऐसी स्थिति में ट्रेन परिचालन को मैन्युअल तरीके से संचालित करना पड़ता है. इससे परिचालन प्रभावित होने की संभावना रहती है.
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लागू होने के बाद सिग्नलिंग व्यवस्था को अधिक आधुनिक और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी. इससे तकनीकी बाधाओं को कम करने के साथ रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में भी सहयोग मिलेगा.
यात्रियों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि सिग्नलिंग से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश होगी, जिससे ट्रेनों के संचालन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके.
कवच लागू करने में भी मिलेगी मदद
रेलवे के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग पूरे मंडल के सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच के कार्यान्वयन में भी मदद मिलेगी.
कवच जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणाली के लिए मजबूत सिग्नलिंग बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में 21 स्टेशनों पर ईआई सिस्टम लगाने की योजना को भविष्य की रेलवे सुरक्षा व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
Electronic Interlocking Sahrsa Mansi Rail Section: 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य, अब टेंडर की बारी
रेलवे ने ईआई वर्क को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है और इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. इसके बाद चयनित स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने का काम आगे बढ़ेगा.
पूर्व मध्य रेलवे की सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के माध्यम से 21 स्टेशनों की सिग्नलिंग व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जायेगा. पैनल सिस्टम की जगह स्क्रीन आधारित आधुनिक व्यवस्था काम करेगी और प्रत्येक स्टेशन पर दो-दो स्क्रीन के माध्यम से संचालन किया जायेगा.
उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय रेलवे द्वारा पूरे नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण, रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में किये जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है.
अब निगाहें टेंडर प्रक्रिया और उसके बाद शुरू होने वाले काम पर हैं. यदि तय समयसीमा के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो 2027 तक इन 21 स्टेशनों पर सिग्नलिंग का पुराना चेहरा बदलकर स्क्रीन आधारित आधुनिक व्यवस्था दिखाई दे सकती है.
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