Eid Miladunnabi Salakhua: सलखुआ प्रखंड में बुधवार को ईद मिलादुन्नबी का पर्व अकीदत, उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया. सुबह से ही विभिन्न गांवों में धार्मिक माहौल बना रहा. खोजराहा, हरेवा, मोबारकपुर और गोरगामा समेत कई गांवों से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया. बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए और पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए अमन, शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया.
जुलूस के दौरान लोगों में खासा उत्साह नजर आया. धार्मिक नारों और पैगंबर साहब की शिक्षाओं की चर्चा के बीच जुलूस विभिन्न रास्तों से गुजरा. पर्व के धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया.
रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को मनाया जाता है पर्व
ईद मिलादुन्नबी इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को मनाया जाता है. यह दिन पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब की पैदाइश की याद में मनाया जाता है. इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूस के माध्यम से उनके जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं को याद किया जाता है.
सलखुआ में भी आयोजित कार्यक्रमों का मुख्य संदेश समाज में शांति और सद्भाव को मजबूत करना रहा. लोगों ने पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया.
सच्चाई, दया और इंसानियत को बताया जीवन का आधार
धार्मिक वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब की शिक्षाओं में सच्चाई, ईमानदारी, दया, न्याय और इंसानियत को विशेष महत्व दिया गया है. लोगों से एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की गयी.
वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती केवल धार्मिक आयोजनों से नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता से होती है. जरूरतमंदों की मदद, कमजोर लोगों के साथ न्याय और बिना भेदभाव मानवता की सेवा करने की भावना को मजबूत करना जरूरी है.
महिलाओं और कमजोर वर्गों के सम्मान पर जोर
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा का भी संदेश दिया गया. वक्ताओं ने कहा कि गरीब, अनाथ और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है.
समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने तथा उनके अधिकारों का सम्मान करने की अपील की गयी. शिक्षा और ज्ञान को भी बेहतर समाज की बुनियाद बताते हुए लोगों से अज्ञानता से दूर रहने और ज्ञान हासिल करने का आह्वान किया गया.
शराब, जुआ और धोखाधड़ी से दूर रहने की अपील
धार्मिक वक्ताओं ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया. शराब, जुआ, सूद, धोखाधड़ी, अन्याय और जुल्म जैसी बुराइयों से दूर रहने की अपील की गयी.
वक्ताओं ने कहा कि समाज में स्थायी शांति तभी संभव है, जब लोग अपने आचरण में सच्चाई, ईमानदारी और आपसी सम्मान को जगह दें. एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से ही भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है.
जुलूस के दौरान प्रशासन रहा अलर्ट
ईद मिलादुन्नबी को लेकर प्रशासन ने भी विधि-व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी. विभिन्न स्थानों से निकले जुलूसों की निगरानी की गयी. सलखुआ थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ठाकुर, आरओ सचिन आनंद, एएसआई दिलीप कुमार चौधरी और एएसआई मो. फिरोज आलम मौजूद रहे.
प्रशासन की निगरानी और स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरे प्रखंड में पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गयी.
Eid Miladunnabi Salakhua: गांवों में दिखी पर्व की रौनक
खोजराहा, हरेवा, मोबारकपुर और गोरगामा सहित विभिन्न गांवों में ईद मिलादुन्नबी को लेकर लोगों में उत्साह रहा. जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने पर्व की रौनक बढ़ा दी.
दिनभर धार्मिक माहौल के बीच अमन, भाईचारे और इंसानियत की बातें होती रहीं. सलखुआ में पर्व का समापन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और लोगों ने पैगंबर साहब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संदेश दिया.
मौके पर मुफ्ती आफाक आलम, मौलाना रिजवान अहमद कादरी, हाफिज नकी अहमद, मौलाना फजले वारिस, मौलाना अम्मार अहमद, मास्टर बेलाल अहमद, मोदस्सिर, मास्टर नेहाल, मास्टर जावेद, जलाल अहमद, अरशद मंजर, नसर अहमद, खुशतर, मुजफ्फर आलम, सुहैल अहमद, फुजैल अहमद, गुलजार अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
Also Read: नेपाल में बाढ़ से बिहार में दहशत, अमित शाह ने किया सम्राट चौधरी को फोन, मांगी पूरी जानकारी
