शिक्षा ही ऐसा साधन है जिससे इस क्षेत्र के लोगों का हो सकता है कल्याण: मनोज कुमार

शिक्षा ही ऐसा साधन है जिससे इस क्षेत्र के लोगों का हो सकता है कल्याण: मनोज कुमार

अभ्युदय इंटरनेशनल स्कूल के दूसरे ब्रांच का डीआईजी ने किया उद्धघाटन सहरसा . शिक्षा जगत में अभ्युदय इंटरनेशनल स्कूल द्वारा छात्रों व शिक्षकों के लिए पथ प्रदर्शित कर रहा है. जिसके कारण शिक्षा क्षेत्र में अनेक क्रांतिकारी कदम उठाए गये हैं. शुक्रवार को अपने स्कूल के पांचवें प्रवेश वर्ष पर राधाकृष्ण नगर में दूसरी शाखा का उद्घाटन किया गया. उद्घाटन करते डीआईजी मनोज कुमार ने स्कूल के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते कहा कि कोसी क्षेत्र में शिक्षा की विशेष आवश्यकता है. शिक्षा के क्षेत्र में पीयूष झा का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने गरीब व मेधावी छात्रों के लिए साहसिक कदम उठाते विद्यालय का विस्तार कर दूसरा बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि शिक्षा ही ऐसा साधन है, जिससे इस क्षेत्र के लोगों का कल्याण हो सकता है. दूसरा कोई अन्य साधन नहीं है. प्राचीन काल से सहरसा की धरती विद्वानों की धरती रही है. पूरे विश्व में विद्या के क्षेत्र में मिथिला व कोसी अलग स्थान रखता है. उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पुलिस पाठशाला चलाया गया. जिसके तहत भागलपुर में 252 बच्चों ने सफलता पायी. जिसमें 54 सब इंस्पेक्टर पुलिस बने. वहीं मुजफ्फरपुर में भी स्कूल का संचालन सामुदायिक पाठशाला के रूप में किया गया. चेतना त्रिपाठी ने कहा कि किशोरियों के मानसिक प्रभाव पर स्वयंसेवी संगठन के रूप में कार्य किया जा रहा है. जिसके तहत निर्बल एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा रही है. समाजसेवी डॉ रमण झा ने कहा कि वैदिक युग से ही मिथिला में ज्ञान परंपरा का दौर रहा है. मनुष्य एवं जानवर में केवल शिक्षा का ही अंतर है. इस मौके पर महिषी से आये शत्रुघ्न चौधरी के नेतृत्व में वेद पाठी बच्चों के सस्वर वेद पाठ से कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. कार्यक्रम को इग्नू क्षेत्रीय निदेशक डॉ मिर्जा निहाल अहमद बेग, समाजसेवी डॉ रमण झा, टीईटी एकेडमी के पीयूष कुमार, कुमार लव सोनू ने भी संबोधित किया. सभी ने स्कूल के पढ़ाई उसकी गुणवत्ता को सराहा एवं इसके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की. स्कूल चेयरमैन डॉ शैलेंद्र झा एवं स्कूल की प्राचार्य रीना झा ने अतिथि के प्रति आभार प्रकट किया. कार्यक्रम में कुमार हीरा प्रभाकर, दीपांकर श्रीवास्तव, शैलेश झा, स्कूल की शिक्षक दिव्या, प्रीति लता, निशा, श्रुति, अस्मित, चंदन, संतोष ठाकुर, बासुकीनाथ झा ने भी अपने विचार रखे.

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By Dipankar Shriwastaw

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