रमजान में सेवई की बढ़ी मांग, गांवों में मशीन से तेज हुआ उत्पादन

रमजान के पवित्र महीने में सेवई की मांग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है. खासकर ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सेवई बनाने का काम जोरों पर है.

बाजार में दिख रही रौनक, आधुनिक मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही सेवई

सिमरी बख्तियारपुर. रमजान के पवित्र महीने में सेवई की मांग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है. खासकर ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सेवई बनाने का काम जोरों पर है. आधुनिक मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर सेवई तैयार की जा रही है, जिससे न सिर्फ मांग पूरी हो रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.

आटा या मैदा से बनता है सेवई

रमजान के मौके पर गांवों में सुबह से लेकर देर शाम तक सेवई बनाने का सिलसिला जारी रहता है. मशीन से बनी पतली और साफ-सुथरी सेवई लोगों को काफी पसंद आ रही है. यही वजह है कि स्थानीय बाजारों में ताजी सेवई की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है. रोजेदारों के लिए सेवई इफ्तार और ईद दोनों अवसरों पर एक खास पकवान के रूप में घर-घर पहुंच रही है. प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हुसैन चक के निकट बीते चार वर्षों से रमजान के पावन महीने में मशीन द्वारा बनने वाली सेवई की खूब मांग रहती है. इस संबंध में सेवई निर्माता बदिया निवासी अब्दुल रज्जाक ने बताया कि उन्होंने करीब चार वर्ष पूर्व अहमदाबाद से लगभग 40 हजार रुपये में सेवई बनाने की मशीन खरीदी थी. हर साल रमजान के दौरान बढ़ती मांग को देखते हुए मशीन के द्वारा सेवई का उत्पादन कर बिक्री करता हूं. उन्होंने बताया कि इस मशीन से आटा और मैदा से सेवई तैयार की जाती है, जिससे ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार सेवई मिल जाता है. उन्होंने आगे बताया कि जो लोग अपने घर से आटा या मैदा लेकर आते हैं, उनके लिए मात्र 25 रुपये प्रति किलो की दर से सेवई तैयार कर दी जाती है. इससे आम लोगों को भी सस्ती दर पर ताजी सेवई उपलब्ध हो जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मशीन से बनने वाली सेवई साफ-सुथरी और जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे समय की भी बचत होती है. वहीं दुकानदार के अनुसार रमजान के अंतिम दिनों में इसकी मांग और भी बढ़ने की संभावना है. कुल मिलाकर सेवई का यह कारोबार इन दिनों गांवों में अच्छी आमदनी का जरिया बनता जा रहा है.

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By Dipankar Shriwastaw

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