दावथ प्रखंड मुख्यालय के छात्रों को हाइस्कूल भी नसीब नहीं

दावथ में वर्ग आठ में पास करने के बाद दूसरे पंचायतों में भटकना पड़ता है सैकड़ों छात्रों को

शिक्षा के दावों की खुली पोल. आठवीं के बाद सात किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी

मानक पूरा करने के बाद भी अपग्रेड नहीं हुआ दावथ मध्य विद्यालय, छात्र परेशान

भवनहीन स्कूल हुए प्लस टू पर दावथ का विशाल भवन उपेक्षित, अधर में छात्रों का भविष्य

नौवीं-दशवीं कक्षा की शिक्षा पाने के लिए पांच से सात किमी दूरी तय कर जाते हैं छात्र-छात्राएं

मनोज सिंह, सूर्यपुरा

राज्य सरकार द्वारा एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और हर पंचायत से लेकर गांव तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं. बिहार में लाखों शिक्षकों की बहाली कर स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने का प्रयास भी जारी है. सरकार का संकल्प है कि हर पंचायत में छात्र-छात्राओं को इंटर तक की शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही मिले. लेकिन, इन तमाम दावों और घोषणाओं के बीच रोहतास जिले का दावथ प्रखंड मुख्यालय आज भी एक बड़े अभाव से जूझ रहा है. यहां छात्रों के लिए इंटर की पढ़ाई तो बहुत दूर की बात है, उन्हें नवम और दशम वर्ग की शिक्षा के लिए एक अदद हाइस्कूल तक नसीब नहीं है.

बेटियों के लिए विद्यालय, बेटों के लिए डगर कठिन

दावथ प्रखंड मुख्यालय के ठीक सामने बालिकाओं के लिए प्रोजेक्ट बालिका प्लस टू विद्यालय और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित हैं. सरकार की यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसी प्रखंड मुख्यालय और दावथ पंचायत के अन्य गांवों के लड़कों के लिए स्थिति बिल्कुल विपरीत है. लड़कों को आठवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई जारी रखने के लिए आज भी पांच से सात किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. वे चवरी, बभनौल, कवई, कोआथ और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों में जाने को विवश हैं. बरसात या भीषण गर्मी के मौसम में यह डगर और भी कठिन हो जाती है.

मानकों की अनदेखी और विभाग की अजीब रणनीति

शिक्षा विभाग की कार्यशैली भी यहां सवालों के घेरे में है. पिछले वर्षों में विभाग ने आसपास की कई पंचायतों, जैसे उसरी पंचायत के चवरी और बभनौल पंचायत के मध्य विद्यालयों को अपग्रेड कर हाइस्कूल और प्लस टू का दर्जा दे दिया. हैरानी की बात यह है कि इनमें से कुछ विद्यालय भवनहीन हैं या वहां बुनियादी ढांचे का घोर अभाव है. इसके विपरीत, दावथ प्रखंड मुख्यालय के सामने स्थित मध्य विद्यालय सभी मानकों को पूरा करता है, फिर भी इसे नजरअंदाज किया गया. इस विद्यालय के पास दर्जनों कमरे, विशाल भवन, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय, शुद्ध पेयजल और एक बड़ा खेल मैदान उपलब्ध है. छात्रों की संख्या भी यहां पर्याप्त है, लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण इसे अब तक अपग्रेड नहीं किया गया.

बढ़ रहा है ड्रॉपआउट का खतरा

दावथ प्रखंड का मुख्य बाजार होने के साथ-साथ यहां अंचल कार्यालय, थाना, सरकारी अस्पताल, पावर ग्रिड, दो राष्ट्रीयकृत बैंक और शिक्षा विभाग का बीआरसी कार्यालय भी स्थित है. बिठवा, रसूलपुर, बोदाढ़ी, डिहरा और पंचमंदिर जैसे गांवों के लगभग दो सौ से अधिक छात्र प्रतिवर्ष आठवीं उत्तीर्ण करते हैं. बभनौल इंटर कॉलेज में कार्यरत शिक्षक और दावथ निवासी चारोधाम मिश्रा, ग्रामीण मनोज गुप्ता और संजय कुमार ने बताया कि नौवीं कक्षा में नामांकन के लिए लड़कों को दर-दर भटकना पड़ता है. संसाधनों और पास में स्कूल न होने के कारण कई मेधावी छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे उनके भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक ने विभाग को कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर विकास की गंगा बहा रहा है, जबकि धरातल पर प्रखंड मुख्यालय के बच्चे ही उच्च शिक्षा से वंचित हैं.

क्या कहते हैं ग्रामीण

आज तक दावथ पंचायत में उच्च विद्यालय का निर्माण नहीं होना हम सभी के लिए गहरी चिंता का विषय है. हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द यहां प्लस टू विद्यालय की स्थापना की जाए, ताकि हमारे बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना न पड़े.

मनोज कुमार सिंह, ग्रामीण.

प्रखंड मुख्यालय जैसी महत्वपूर्ण जगह पर लड़कों के लिए हाइस्कूल न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. यह कहीं न कहीं जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर उदासीनता को दर्शाता है.

सलामुद्दीन अंसारी, ग्रामीण.

सांसद और विधायक की लापरवाही के कारण हमारे बच्चे 10 किलोमीटर तक का चक्कर लगाने पर मजबूर हैं. शिक्षा विभाग को इस जटिल समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, ताकि बच्चों का भविष्य संवर सके.

गुड्डू गुप्ता, ग्रामीण.

क्या कहते हैं

पदाधिकारी

दावथ के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी आनंद किशोर सिंह ने स्वीकार किया कि दावथ में बालिकाओं के लिए तो पर्याप्त व्यवस्था है, परंतु बालकों के लिए उच्च विद्यालय का अभाव है. उन्होंने कहा, यह एक गंभीर मसला है. मैं अपने उच्चाधिकारियों से इस संबंध में वार्ता करूंगा. विभाग के संज्ञान में बात लाकर शीघ्र ही दावथ पंचायत में उच्च शिक्षा के लिए स्कूल की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाएगा.

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By Anurag sharan

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