सहरसा सदर अस्पताल परिसर में स्थित सरकारी रक्त केंद्र (ब्लड बैंक) में रक्त की भारी किल्लत के कारण जरूरतमंद मरीजों और उनके तीमारदारों की मुश्किलें चरम पर पहुंच गई हैं. सबसे विकट स्थिति थैलेसीमिया से पीड़ित मासूम बच्चों और गंभीर आपातकालीन मरीजों के सामने खड़ी हो गई है, जिन्हें समय पर रक्त न मिलने से उनके परिजन खून की व्यवस्था के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. इस गंभीर मानवीय संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ रक्तदाता एवं 'श्री शंकर बाबू स्मृति सेवा फाउंडेशन' के चेयरमैन गणेश कुमार भगत ने इसे ब्लड बैंक प्रबंधन की घोर लापरवाही और मनमानी कार्यशैली का परिणाम बताया है.
थैलेसीमिया पीड़ितों पर संकट, निजी ब्लड बैंकों को लाभ पहुंचाने का आरोप
सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में उपजे इस संकट को लेकर सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है:
- जिंदगी पर खतरा: थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. रक्त केंद्र में स्टॉक खत्म होने से बच्चों के जीवन पर सीधा संकट मंडरा रहा है.
- रक्तदाताओं की उपेक्षा: 60 से अधिक बार रक्तदान कर चुके गणेश कुमार भगत ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक प्रबंधन सामाजिक संगठनों और नियमित निस्वार्थ रक्तदाताओं को व्यवस्था से जोड़ने के बजाय उनकी लगातार उपेक्षा कर रहा है, जिससे डोनर्स में निराशा बढ़ रही है.
- निजी ब्लड बैंकों को फायदा: उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि सरकारी रक्त केंद्र की इस बदहाली और अव्यवस्था का सीधा फायदा जिले में संचालित निजी ब्लड बैंकों और दलालों को मिल रहा है.
2023 में गठित निगरानी समिति हुई निष्प्रभावी
निगरानी तंत्र के कमजोर होने से अस्पताल की व्यवस्था पटरी से उतर गई है:
- डीएम वैभव चौधरी की पहल: गणेश भगत ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में विश्व रक्तदाता दिवस के मौके पर तत्कालीन जिलाधिकारी वैभव चौधरी ने सरकारी और निजी ब्लड बैंकों के कामकाज की मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष निगरानी समिति का गठन किया था.
- ठंडे बस्ते में योजना: समिति की गतिविधियां कुछ समय बाद ठप हो गईं, जिसका खामियाजा आज गरीब और असहाय मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.
जिलाधिकारी से समीक्षा बैठक और उच्चस्तरीय जांच की मांग
रक्त संकट को दूर करने और व्यवस्था में सुधार के लिए उन्होंने वर्तमान जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है:
- मासिक समीक्षा बैठक: सक्रिय रक्तदाताओं और सामाजिक संस्थाओं के साथ जिला प्रशासन हर माह नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करे.
- समिति को सक्रिय करना: 2023 में गठित निगरानी समिति को तत्काल पुनः सक्रिय कर सभी सरकारी व निजी रक्त केंद्रों का औचक निरीक्षण कराया जाए.
- अनियमितताओं की जांच: सदर अस्पताल रक्त केंद्र की कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराकर लापरवाह कर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा थैलेसीमिया व अन्य गंभीर मरीजों को समय पर निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाए.
