सहरसा: आस्था का महाकेंद्र है काठो का बाबा मटेश्वर धाम, सावन में उमड़ता है शिवभक्तों का सैलाब; दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

सहरसा जिले का बाबा मटेश्वर धाम शिवभक्तों के लिए आस्था का अनमोल केंद्र है. यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग की महिमा अपरंपार है और सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. सावन और महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है.

सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड अंतर्गत काठो गांव में स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक 'बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर' लाखों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था व विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह पावन स्थल क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. लोकमान्यता है कि सच्चे हृदय से बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार में शीश नवाने वाले किसी भी भक्त की झोली कभी खाली नहीं रहती और भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करते हैं.

स्वयंभू शिवलिंग और मंदिर की पौराणिक महत्ता

काठो स्थित बाबा मटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को असीम मानसिक शांति और भक्ति का अनूठा अनुभव होता है:

  • स्वयंभू प्राकट्य: मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राचीन इतिहास है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग किसी मानव द्वारा स्थापित नहीं, बल्कि स्वयंभू स्वरूप में स्वयं प्रकट हुआ था.
  • निरंतर आराधना: प्राकट्य काल से ही यहां अनवरत वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम जारी है. सुबह की मंगला आरती से लेकर संध्या आरती तक मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गुंजायमान रहता है.

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ता है आस्था का जनसैलाब

यूं तो वर्षभर मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन माह और महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां का दृश्य देखते ही बनता है:

  • छर्रापट्टी से कांवड़ यात्रा: सावन के पूरे महीने मुंगेर जिले के प्रसिद्ध छर्रापट्टी गंगा घाट से हजारों कांवरिये व डाक बम पवित्र गंगाजल भरकर रातभर पैदल यात्रा करते हुए बाबा के जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.
  • भव्य सांस्कृतिक आयोजन: महाशिवरात्रि के महापर्व पर कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से मंदिर परिसर में दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाता है.
  • विशेष श्रृंगार व रुद्राभिषेक: पर्व-त्योहारों के दौरान बाबा का सुगंधित पुष्पों व बेलपत्र से आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महारुद्राभिषेक संपन्न कराया जाता है.

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता मटेश्वर धाम

स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों के अनुसार, बाबा मटेश्वर धाम मंदिर अब केवल स्थानीय पूजा स्थल तक सीमित न रहकर एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र (Spiritual Tourism) के रूप में अपनी पहचान बना चुका है.

श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना के साथ-साथ कोसी-मिथिलांचल की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति और शांत आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं. मंदिर परिसर के सुंदरीकरण और यात्री सुविधाओं में लगातार हो रहे विस्तार से हर वर्ष यहां आने वाले पर्यटकों और शिवभक्तों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है.


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By Vinay Kumar Mishra

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