सुबह की आरती से लेकर शाम की महाआरती तक चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर में आस्था की लौ लगातार जलती रहती है. मंदिर में प्रवेश करते ही घंटियों की गूंज, धूप की खुशबू और मां काली के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक हो उठता है. सहरसा ही नहीं, कोसी क्षेत्र और आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. कोई परिवार की सुख-शांति मांगता है तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद मां के दरबार में आभार जताने पहुंचता है.
दो मंदिरों के बीच आज भी पुराने दरबार की अलग पहचान
चैनपुर में अब मां काली के दो मंदिर हो चुके हैं, लेकिन पुराना मंदिर वर्षों बाद भी क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराएं काफी पुरानी हैं. पीढ़ियों से लोग यहां मां काली की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं.
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीन परंपरा और शक्ति उपासना से जुड़ी मान्यताएं हैं. दूर-दराज से आने वाले भक्त मंदिर में दीप जलाकर मां का आशीर्वाद लेते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.
सुबह-शाम आरती में उमड़ते हैं श्रद्धालु
मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती का आयोजन होता है. आरती के दौरान घंटियों और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठता है. श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर धूप, दीप और पुष्प अर्पित करते हैं.
भक्तों का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती. यही विश्वास हर दिन बड़ी संख्या में लोगों को चैनपुर तक खींच लाता है.
नवरात्र और अमावस्या में बदल जाता है मंदिर का नजारा
नवरात्र, काली पूजा और विशेष अमावस्या के अवसर पर चैनपुर का यह मंदिर श्रद्धालुओं से भर जाता है. सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार का सिलसिला चलता रहता है.
विशेष अवसरों पर मां काली का भव्य श्रृंगार किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न होने के बाद महाआरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. भक्त मंदिर परिसर में दीप प्रज्वलित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.
मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु चढ़ाते हैं बलि
स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार मनोकामना पूरी होने के बाद कुछ श्रद्धालु मां के दरबार में बलि भी प्रदान करते हैं. खासकर दीपावली और काली पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. इस दौरान छाग की बलि देने की परंपरा भी देखने को मिलती है.
साफ-सफाई और रोशनी से बढ़ी मंदिर की खूबसूरती
हाल के वर्षों में मंदिर परिसर में साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्य किए गए हैं. शाम के समय मंदिर परिसर में आकर्षक रोशनी की जाती है. रोशनी से सजा मंदिर और घंटियों की गूंज श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मां काली की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यही विश्वास मंदिर की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है.
आस्था के साथ पर्यटन का भी केंद्र
चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की पुरानी परंपराओं और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास गहराई से जुड़ा है कि मां काली के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. यही आस्था इस प्राचीन मंदिर को आज भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष बनाती है.
