पंजाब ले जा रहे चार बाल मजदूरों को कराया मुक्त

कार्रवाई. चाइल्ड लाइन के सहयोग से मिली सफलता मधेपुरा व अररिया जिले से पंजाब के लुधियाना ले जाये रहे चार बाल मजदूरों को गुप्त सूचना के आधार पर स्थानीय चाइल्ड लाइन के सहयोग से मुक्त कराया गया. सहरसा : कोसी व सीमांचल जैसे पिछड़े इलाके में चाइल्ड ट्रैफिकिंग का मामला रुकने का नाम ही नहीं […]

कार्रवाई. चाइल्ड लाइन के सहयोग से मिली सफलता

मधेपुरा व अररिया जिले से पंजाब के लुधियाना ले जाये रहे चार बाल मजदूरों को गुप्त सूचना के आधार पर स्थानीय चाइल्ड लाइन के सहयोग से मुक्त कराया गया.
सहरसा : कोसी व सीमांचल जैसे पिछड़े इलाके में चाइल्ड ट्रैफिकिंग का मामला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. बुधवार को मधेपुरा व अररिया जिले से पंजाब के लुधियाना ले जा रहे चार बाल मजदूरों को गुप्त सूचना के आधार पर स्थानीय चाइल्ड लाइन के सहयोग से छुड़ाया गया. बच्चों से पूछताछ में सामने आया कि उसके जैसे न जाने कितने बच्चे हैं, जो पंजाब के छोटे-छोटे शहरों में फैक्टरी में बंद गुप्त कमरे में दिन रात बाल मजदूरी करने को विवश हैं. बुधवार को जिन चार बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया,
उसमें मधेपुरा जिला जोरगामा के मो बसीर का दस वर्षीय पुत्र मो अबुंद, सुंदरपट्टी चैनपुर मुरलीगंज निवासी मो नुरूल के 9 वर्षीय पुत्र मो इजहार, जोरगामा के ही मो आरिफ का दस वर्षीय पुत्र मो आसीफ के साथ अररिया जिले के हिंगवा भरगामा के मो अब्बास का 9 वर्षीय पुत्र कलामुदीन शामिल है. जिसे गुप्त सूचना मिलने पर चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य दीपक कुमार, राजेश कुमार, बिनोद मिस्त्री, कुमोद पासवान ने प्रशांत मोड़ के पास से छुड़ाया. हालांकि इन बच्चों को ले जाने वाला दलाल गिरफ्त में नहीं आ सका. वह मौके को भांप निकलने में कामयाब रहा.
बंद कमरे में बाल मजदूरों से लिया जाता है काम
बुधवार को मुक्त कराये गये चार बाल मजदूरों में से दो पहले भी पंजाब के लुधियाना में चेन बनाने वाली फैक्टरी में काम कर चुके हैं. मो नसीम व मो अबुल ने पूछताछ के दौरान कई रहस्यमय तथ्य को उजागर किया है. दोनों मासूम ने सीधा सीधा कहा कि उनके ही गांव जोरगामा के मो लाल मियां नाम के दलाल उस आसपास के गांव के सैकड़ों बाल मजदूरों को पंजाब ले जाकर उनसे फैक्टरी में काम करवाते हैं. उक्त दोनों बच्चों ने कहा कि वे भी इससे पहले पंजाब के लुधियाना शहर में पीके गुलाटी के चेन बनाने वाली फैक्टी में काम कर चुके हैं. एक साल वहां रहने के बाद घर से फिर लाल मियां उन लोगों को अपने साथ लुधियाना ले जा रहा था. बच्चों ने बताया कि जिस जगह उनलोगों से काम करवाया जाता है.
उसके बारे में वहां के लोगों को भी कुछ पता नहीं होता है. बंद कमरे में उन लोगों से दिन रात काम करवाया जाता है. जिसके लिए चार हजार रुपये ठेकेदार द्वारा उनके अभिभावक को तीन चार महीने पर भेज दिया जाता है. करीब दस दिन पहले भी इसी लाल मियां द्वारा करीब दस और बाल मजदूरों को पहले ही पंजाब भेजने का काम किया जा चुका है. मालूम हो कि इससे पहले भी 31 मार्च को इसी प्रशांत मोड़ के निकट से गुप्त सूचना के जरिये चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने सुपौल जिले के पांच व मधेपुरा जिले के चार बाल मजदूरों को मुक्त कराया था.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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