दो दिवसीय साईं उत्सव शुरू
सहरसा: साईं सेवा समिति द्वारा शहर के मसोमात पोखर पर दो दिवसीय साईं उत्सव का आयोजन बुधवार को शुरू हुआ. मुख्य आयोजन स्थल पर महाआरती से शुरू हुए कार्यक्रम में सैकड़ों महिला व पुरुष साईं भक्त शामिल हुए. श्रद्धा सहित सबों ने तल्लीन होकर साईं की भक्ति की. बनाये गये बड़े पंडाल के विशाल मंच पर साईं बाबा का सिंहासन सजाया गया था. पंडाल के अंदर व बाहर साईं जीवन दर्शन से जुड़ी पोस्टर प्रदर्शनी भी लगायी गयी थी. इसके साथ ही लगाये गये साईं सच्चरित्र संक्षिप्त सार को पढ़ते भक्त नजर आये. आरती के बाद उत्सव स्थल से साईं पालकी यात्र निकाली गयी. यात्र महावीर चौक होते हुए दहलान चौक, शंकर चौक, डीबी रोड, थाना चौक, गंगजला चौक, बस स्टैंड, प्रशांत मोड़ व बंगाली बाजार होते वापस मसोमात पोखर तक पहुंची. बुधवार की शाम उत्सव स्थल पर दिल्ली, धनबाद व बलुआहा के कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. देर रात तक साईं भक्त भजनों में गोता लगाते रहे व कलाकार तालियां बटोरते रहे.
हजारों लोग हुए शामिल
साईं उत्सव के पहले दिन मसोमात पोखर से निकाली गयी भव्य पालकी यात्र में आयोजन समिति से जुड़े लोगों के अलावा सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए. दो हाथी, दर्जनों घोड़े व सैकड़ों बाइक पर सवार श्रद्धालु साईं धुन में रमे हुए थे. हाथों में ध्वज व माथे पर सबका मालिक एक लिखी पट्टी लगाये भक्त साईं के जयकारे लगाते रहे. जय श्री साईं के जयकारे से पूरा शहर गुंजायमान रहा. यात्र जिस रास्ते से गुजरती, श्रद्धालु शामिल होते जाते. भक्तों में साईं की पालकी को कंधे लगाने की होड़ लगी रही. पालकी यात्र के दौरान शहरवासी साईं भक्तों के स्वागत में फूल बरसाये व विभिन्न जगहों पर उनके लिए शरबत की भी व्यवस्था की गयी थी. पालकी यात्र के दौरान साथ चल रहे डीजे व उस पर बजते साईं भजन से भी माहौल भक्तिमय बना रहा.
विधायक भी हुए शामिल
भव्य साईं पालकी यात्र में स्थानीय विधायक डॉ आलोक रंजन, छातापुर के विधायक नीरज कुमार बबलू सहित पूर्व विधायक संजीव कुमार झा भी शामिल हुए. इनके अलावा घनश्याम चौधरी, अनिल सिंह, आयोजन समिति के संयोजक पप्पू ठाकुर, कार्यकर्ता श्याम जायसवाल, बजरंग गुप्ता, विष्णु स्वर्णकार, मनोज राय, राजेश झा, करण कुमार, मिथिलेश ओझा, अमित चौधरी, प्रमोद कुमार, अंतु मिश्र, गोलू यादव, विशाल कुमार बिट्ट सहित अन्य व्यवस्था बनाये रखने में सक्रिय दिखे. सुरक्षा की दृष्टिकोण से पालकी यात्र के साथ स्थानीय थाने की पुलिस भी चल रही थी.
