यातायात के लिए अब नाव का नहीं रहेगा सहारा
कुमार मनीष/सहरसा: बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी पर तीसरा पुल महिषी के बलुआहा घाट में बनकर तैयार है. शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसका उदघाटन कर इस तीसरे पुल को लोकार्पित करेंगे. हालांकि बचे हुए एप्रोच का कार्य उदघाटन के बाद भी होता रहेगा. कोसी नदी पर बने सभी पुल का अपना विशेष महत्व है.
सुपौल जिले के भीमनगर में बना कोसी बराज भारत व नेपाल दो देशों को जोड़ता है. नेपाली भूभाग पर बने इस बराज के सहारे ही जिले के कई गांव मुख्यालय से जुड़ पाते थे. दूसरा सुपौल जिले के ही भपटियाही में बने कोसी महासेतु ने तो पूरे सुपौल जिले सहित कोसी के इलाकों की तसवीर और तकदीर दोनों ही बदल डाली. 24 घंटे के सफर को महज दो से तीन घंटे में सिमटा दिया. राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा हो या फिर अहमदाबाद, गुआहाटी और सिल्चर सबको फोर लेन से सीधा जोड़ सदियों से कोसी के पिछड़े इलाके की किस्मत ही बदल डाली. तीसरा महासेतु महिषी में बनाया गया. इसके बन जाने से दशकों से कोसी के गर्भ में रहने वाले सैकड़ों गांव व हजारों परिवार सीधे रूप से अपने जिला मुख्यालय से जुड़ जायेंगे. कल तक जिन्हें अपने ही शहर पहुंचने में दिन भर का समय लग जाता था, पुल बनने से अब वे 30 से 35 मिनट में ही पहुंच जायेंगे. वे सहरसा से जुड़ देश दुनियां से भी सीधे संपर्क में आ जायेंगे. अच्छे स्वास्थ्य, अच्छी शिक्षा व्यवस्था एवं अच्छे सामान (गुणवत्तापूर्ण उत्पाद) तक उनकी पहुंच आसान हो जायेगी. सबसे बड़ी उपलब्धि यह होगी कि शहर तक पहुंचने के लिए इनके यातायात का एकमात्र साधन व रिस्की नाव का सहारा समाप्त हो जायेगा. दो-ढ़ाई वर्षो के बाद यही कोसी महासेतु कोसी नदी के बीच रहने वालों सहित संपूर्ण जिलेवासियों के लिए एक बार फिर वरदान साबित होगा, जब गंडौल से दरभंगा जिले के बिरौल के बीच महासेतु का दूसरा हिस्सा बनकर तैयार हो जायेगा. पूर्वी व पश्चिमी कोसी तटबंध के बीच रहने वालों के लिए सहरसा व दरभंगा की दूरी समान हो जायेगी.
