सिमरी बख्तियारपुर : किसी भी समाज का विकास शिक्षा व शिक्षित लोगों के बगैर सोचना बैमानी है. एक ओर जहां सरकार शिक्षा के उन्नयन पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. वहीं धरातल पर इसका फायदा कहीं नजर नहीं आता है. अनुमंडल मुख्यालय स्थित हरिवंश मध्य विद्यालय व प्लस टू उच्च विद्यालय के परिसर में 1970-80 के दशक में समृद्ध रहा छात्रावास आज खंडहर में तब्दील हो गया है. छात्रावास के नहीं रहने से गरीब छात्रों को ऊंची शिक्षा प्राप्त करने में परेशानी बनी हुई है.
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे अक्सर उच्च शिक्षा से वंचित भी हो जा रहे हैं. सक्षम व समर्थ अभिभावकअपने बच्चों के रहने के लिए किराये पर कमरे लेकर शहरों में पढ़ाई तो करा लेते हैं, लेकिन कई गरीब बच्चों को ऊंची शिक्षा का ख्वाब बीच में ही दफन करना पड़ता है. अपने मजदूर माता-पिता के कामों में हाथ बंटा परिवार को चलाने की जिम्मेवारी संभालनी पड़ती है.
1984 के बाढ़ में हो गया था क्षतिग्रस्त: 80 के दशक में यह छात्रावास अपने शीर्ष चरम पर था. जब सैकड़ों की संख्या में दूर-दराज से आए छात्र छात्रावास में रहकर अध्ययन करते थे.
जिसमें से कई छात्र आज सरकारी सेवाओं में उच्च पदों पर पदस्थापित हैं. 1984 में आई बाढ़ में इस छात्रावास का कुछ हिस्सा धराशायी हो गया था. बाढ़ के खत्म होने पर छात्रावास की बिगड़ी दशा सुधारने में या उसके जीणोद्धार करने में शसन व प्रशासन ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी. लिहाजा धीरे-धीरे यह छात्रावास सिकुड़ता चला गया और आज पहचान बताने भर के लिए छात्रावास का कुछ हिस्सा ही बचा है.
खंडहर में तब्दील हो चुके इस छात्रावास में सुअरों का पालन किया जा रहा है. सरकार, जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग की लापरवाही की जीता-जागता उदाहरण बनकर रह गया है. क्षेत्र के शिक्षाविदों ने क्षेत्रीय सांसद व विधायकों से इस छात्रावास की गरिमा फिर से लौटाने की मांग की है.
