बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हैं किसान आठ से नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच रहे हैं धान1450 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य का नहीं मिल रहा लाभ प्रतिनिधि, पतरघट प्रखंड स्तर पर सरकारी स्तर से धान की खरीद नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसान धान को औने-पौने भाव पर व्यापारियों को बेचने को विवश हैं. किसानों धान को ऊंची कीमत पाने की आस में रखे हुए थे, लेकिन सरकार द्वारा दिये निर्देश की प्रशासन द्वारा कोई तबज्जो नहीं देकर अब तक धान खरीद नहीं किये जाने के कारण किसानों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है. किसानों के धान की सरकारी खरीद नहीं होने पर समर्थन मूल्य सही हकदार किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है. इसके कारण किसान अपनी मजबूरीवश अपनी धान व्यापारियों को आठ सौ से नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने को लाचार है. —हतोत्साहित हो रहे हैं किसानअगर पूर्व में खरीद की गयी धान क्रय की ईमानदारी से प्रशासन द्वारा जांच की जाय तो मात्र 25 प्रतिशत ही ऐसे किसान हैं जो इसका लाभ प्राप्त कर पाये हैं. किसान धीरेंद्र प्रसाद सिंह, दिलीप कुमार यादव, मुनचुन सिंह, संजय कुमार सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा किसानों की उपेक्षा की वजह से अब खेती करने का मन नहीं कर रहा है. एक तो नकली खाद-बीज और ऊपर से प्रकृति की मार. इसके अलावा प्रशासनिक पदाधिकारी द्वारा की जा रही अनदेखी से किसानों का मन अब खेती से उचटता जा रहा है. इस बाबत प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि जल्द ही धान खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. जिसके लिए सभी औपचारिकता पूरी की जा रही है.
बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हैं किसान
बिचौलियों के हाथों धान बेचने को मजबूर हैं किसान आठ से नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच रहे हैं धान1450 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य का नहीं मिल रहा लाभ प्रतिनिधि, पतरघट प्रखंड स्तर पर सरकारी स्तर से धान की खरीद नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसान धान को औने-पौने भाव […]
