स्टैंड में रोशनी की भी नहीं है व्यवस्था
सहरसा सिटी : नगर परिषद को लाखों का राजस्व देने वाला शहर का मुख्य बस स्टैंड खुद अपने उद्धारक की बाट जोह रहा है. लोगों की मंगलमय व सुखद यात्रा असुविधा से ही शुरू होती है. पीने के लिए पानी हो या शौचालय बस स्टैंड में खोजने से भी नहीं मिलता है. रोजाना हजारों यात्रियों का यहां से आना-जाना लगा रहता है.
इसके बावजूद राजस्व वसूली करने वाली संस्था नगर परिषद स्टैंड में सुविधा मुहैया कराने की बजाय उदासीन रहती है. हद तो यह है कि यहां प्रकाश की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गयी है. कुछ दिन पूर्व बस स्टैंड को अन्यत्र ले जाने की बात हुई थी, जो अब हवा हवाई लगने लगी है.
बरसात में पैर रखना मुश्किल: बरसात का मौसम शुरू होते ही स्टैंड पर बस संचालक सहित यात्रियों की फजीहत शुरू हो जाती है. स्टैंड कीचड़मय हो जाता है. लोगों को आने जाने में भी दिक्कत होती है. बस स्टैंड की बदहाली भी किसी से छुपी हुई नहीं है. बस आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिवाकर सिंह कहते हैं कि बरसात के दिनों में स्टैंड कीचड़मय हो जाता है. गाड़ी अपने नंबर के इंतजार में घंटों खड़ी रहती है. इससे गाड़ी के नीचे का हिस्सा सड़ने लगता है.
मुख्य बस पड़ाव पर गंदगी के बीच बस खड़ी रहती है. चालक बताते हैं कि बस का दरवाजा खुला रहने पर चूहा प्रवेश कर जाता है. बस कर्मियों ने बताया कि नगर परिषद द्वारा स्टैंड की सड़कों पर सिर्फ झाड़ू दिया जाता है, लेकिन कभी भी परिसर के अंदर झाड़ू या सफाई नगर परिषद नहीं करवाती है.
