खेल से नहीं, धरना से है पहचान

सहरसा नगर : मुख्यालय स्थित इंडोर स्टेडियम के समीप वर्षों से उपेक्षित आउटडोर स्टेडियम की पहचान अनशन स्थल के रूप में बड़ी तेजी से फैलने लगी है. स्टेडियम के निर्माण की प्रक्रिया बीते आठ साल से विभागीय उपेक्षा का दंश लिए सरकारी फाइल में दब सी गयी है. जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण को लेकर निर्माण कार्य […]

सहरसा नगर : मुख्यालय स्थित इंडोर स्टेडियम के समीप वर्षों से उपेक्षित आउटडोर स्टेडियम की पहचान अनशन स्थल के रूप में बड़ी तेजी से फैलने लगी है. स्टेडियम के निर्माण की प्रक्रिया बीते आठ साल से विभागीय उपेक्षा का दंश लिए सरकारी फाइल में दब सी गयी है.

जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण को लेकर निर्माण कार्य शुरू हुए आज आठ वर्ष बीत गये हैं. बावजूद यह अभी तक अधूरा है. जिला में तैनात अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक अनशन स्थल तक जाते हैं, लेकिन स्टेडियम की दशा सुधारने के लिए सजग नहीं दिखते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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