मांगने की प्रवृत्ति त्याग ही सच्ची ईश्वर भक्ति संभव : विदुषी हेमलता

मांगने की प्रवृत्ति त्याग ही सच्ची ईश्वर भक्ति संभव : विदुषी हेमलता सोहा में चल रहा नौै दिवसीय विराट विष्णु महायज्ञ संपन्न भक्तिभाव व आस्था के समर्पण में डूबा रहा इलाकाजय श्री राम व राधे-राधे के जयघोष से गूंजता रहा इलाका सोनवर्षाराजसोहा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीश्री 108 विष्णु विराट महायज्ञ के समापन प्रवचन […]

मांगने की प्रवृत्ति त्याग ही सच्ची ईश्वर भक्ति संभव : विदुषी हेमलता सोहा में चल रहा नौै दिवसीय विराट विष्णु महायज्ञ संपन्न भक्तिभाव व आस्था के समर्पण में डूबा रहा इलाकाजय श्री राम व राधे-राधे के जयघोष से गूंजता रहा इलाका सोनवर्षाराजसोहा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीश्री 108 विष्णु विराट महायज्ञ के समापन प्रवचन के मौके पर मातृ शक्ति सेवा संस्थान की विदुषी हेमलता शास्त्री ने कहा कि ईश्वर अपने सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य के निर्माण के बाद यह सोचने को विवश हो गये कि संसार में मनुष्य को छोड़कर सभी जीवन अपने जीवन में आनंद मना रहा है. लेकिन एकमात्र मनुष्य है जो हमेशा दुखी रहता है या मंदिर, मस्जिद और चर्च में लंबी पंक्ति में खड़ा होकर ईश्वर से कुछ न कुछ मांग रहा होता है. मनुष्य को इस प्रवृत्ति को बदलकर ही ईश्वर की आराधना करनी चाहिए तभी सच्ची भक्ति संभव है. समापन प्रवचन के बाद यज्ञ कमेटी द्वारा विदुषी को तलवार व अंगवस्त्रम् से सम्मानित किया गया. इसके बाद हवन में पूर्णाहुति दी गयी. सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष ढ़ोल, बैंड बाजार के साथ सभी प्रतिमाओं को तिलावे नदी में विसर्जन के लिए एक जुलूस निकाल ले जाया गया. जय श्रीराम व राधे-राधे के जयघोष ने संपूर्ण क्षेत्र गुंजायमान रहा. अबीर व गुलाल के रंगों के साथ संपन्न हुए महायज्ञ में नवगछिया के स्वामी अगमानंद परमहंस जी महाराज का प्रवचन, वृंदावन की रासलीला आदि आयोजित की गयी. जबकि महायज्ञ के आयोजन में समस्त सोहा पंचायतवासियों का अभूतपूर्व योगदान रहा. फोटो-यज्ञ 9- समापन प्रवचन करती विदुषी हेमलता फोटो-यज्ञ 10-विसर्जन के लिए निकले जुलूस में शामिल प्रतिमा व लोग

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