मंत्र व श्लोक से गुंजायमान है शहर

सहरसा : नगरया देवी सर्वभूतेषु…’नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो अंबे दुख हरनी…’ जैसे मंत्रों से शहर का कोना-कोना गुंजायमान हो रहा है. पूरे शहर का माहौल भक्तिमय बना हुआ है . हर ओर साफ -सफाई व पवित्रता के साथ पूजा-पाठ हो रही है. अहले सुबह से दोपहर तक एवं शाम से देर रात […]

सहरसा : नगरया देवी सर्वभूतेषु…’नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो अंबे दुख हरनी…’ जैसे मंत्रों से शहर का कोना-कोना गुंजायमान हो रहा है. पूरे शहर का माहौल भक्तिमय बना हुआ है

. हर ओर साफ -सफाई व पवित्रता के साथ पूजा-पाठ हो रही है. अहले सुबह से दोपहर तक एवं शाम से देर रात तक धूप, धूमन, सरर, गुगुल, अगरबत्ती एवं कपूर की सुगंध से माहौल सुवासित हो रहा है. पाठ करने वाले लोग मस्तक पर चंदन का लेप लगा रहे हैं. सुबह शाम भगवती को प्रसाद के रूप में फल एवं मिठाई का भोग लगाया जा रहा है.

व्रती सहित परिवार के लोग आहार ग्रहण करने से पूर्व प्रसाद प्राप्त कर रहे हैं. अधिकतर घरों में अरवा भोजन एवं फलाहार ही चल रहा है. लिहाजा वैसे घरों में महाल्या के दिन से ही प्याज, लहसून व सफेद नमक का उपयोग बंद कर दिया गया है. मंत्रों का पड़ रहा सकारात्मक प्रभावदुर्गापूजा के दौरान गली-मुहल्लों के घर से लेकर भीड़ भरे बाजार का हाल एक समान हो गया है. हर ओर पूजा व भक्ति का ही माहौल है.

सभी पूजा पंडालों में सुबह होते ही भक्ति गीतों के बजने का प्रभाव लोगों की मन:स्थिति पर पड़ रहा है. उनका झुकाव आध्यात्म की ओर हो रहा है. वे सामान्य रूप से भी मंत्र गुनगुनाना ही पसंद कर रहे हैं.

अधिकतर पंडालों में अहले सुबह से ही हिन्दी अर्थ के साथ दुर्गा सप्तशती के मंत्रों की सीडी बज रही है. जो अत्यंत ही कर्णप्रिय है. फूल तोड़ने या टहलने निकले लोग स्थिर होकर इन मंत्रों का भी श्रवण कर रहे हैं. फूल-बेलपत्र लाना दिनचर्या में शामिलदुर्गापूजा के दौरान लोगों की दिनचर्या बदल गयी है. वे धार्मिक, आध्यात्मिक, अनुशासित, संयमित व नियमानुकूल जीवन जी रहे हैं. अहले सुबह उठकर देवी को चढ़ाने के लिए फूल व बेलपत्र लाना उनके दैनिक कर्तव्यों में शामिल हो गया है.

जिनके घर फूल के पेड़ व पौधे हैं. उनके यहां फूल लेने लोग पहुंचते हैं. शास्त्रों में लिखे होने के कारण भगवती को प्रसन्न करने के लिए लाल फूल और बेलपत्र जमा करने के प्रति लोगों की उत्सुकता अधिक रहती है. अभी लाल,केसरिया व सफेद अड़हूल, कनेर, चंपा, बेली, केलावती, तिरा-मीरा जैसे फूलों के पुष्पित होने के कारण वे ही देवी पर चढ़ाये जा रहे हैं.दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की हुई पूजासहरसा नगर. शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन गुरुवार को दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना हुई. धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति के लिए लोगों ने श्रद्धापूर्वक देवी का स्तवन किया.

शहरी क्षेत्र सहित प्रखंड के सभी पूजा पंडालों में महिला-पुरुष भक्तों की संख्या में वृद्धि जारी है. सब्जी बाजार स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर में संगमरमर की स्थायी प्रतिमा होने के कारण सुबह-शाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक है. इसके अलावे थाना रोड स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, पंचवटी, प्रशांत रोड, कॉलेज गेट स्थित पूर्वांचल दुर्गा स्थान, जेल गेट, कचहरी चौक, पुरानी जेल, रेलवे कॉलोनी, लोको शेड में निकटतम मुहल्लों से महिला व लड़कियां सायंकालीन दीप जलाने पहुंच रही हैं. मेला के लिए दुकानों का बनना हुआ शुरूसहरसा नगर.

दुर्गापूजा पर लगने वाले चार दिवसीय मेले के लिए पूजा पंडालों के आसपास अस्थायी दुकानों का बनना शुरू हो गया है. हालांकि कुछ दुकाने यहां पूर्व से ही लगायी जा रही है. पूजा समिति द्वारा पूजा-पंडालों के ईद-गिर्द बनाये जा रहे अस्थायी दुकानों की बुकिंग पूर्व में ही हो चुकी है. दुकान लेने की सबसे अधिक भागमदौड़ थाना चौक स्थित पंडाल के पास है. सभी जगह चाट, छोले, आइसक्रीम, मिठाई, खिलौने, श्रृंगार प्रसाधन की दुकानें सजनी शुरू हो गयी है.

वहीं स्थायी रूप से बसे दुकानदार भी अपने प्रतिष्ठान को आकर्षक रूप देने में जुट गए हैं. इसके अलावे बाजार की दुकानों को भी मेले के लिए आकर्षक रूप दिया जाने लगा है. फोटो – पूजा 5 – कॉलेज गेट पर स्थपित मां दुर्गा की प्रतिमाफोटो – पूजा 6 – थाना चौक पर संध्याकालीन आरती के लिए जुटे श्रद्धालुफोटो- पूजा 7 – पंडाल के आसपास लग गया अभी से मेला

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