सुनअ हो भैया सुन गे बहिना, एक वोट के मिलल अधिकार हो सब काम छोड़, पहिले करिहं अपन मतदान होनुक्कड़ नाटक की टीम मतदान के लिए लोगों को किया प्रेरितप्रतिनिधि, सहरसा सदर जिले के कलाकार अपने गीत-संगीत व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को एक वोट के महत्व को लेकर जागरूक कर रहे हैं. पांच नवम्बर को जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में होने वाले चुनाव को लेकर पिछले चुनाव में सबसे कम औसत वाले मतदान क्षेत्रों में मत प्रतिशत को बढ़ाने की उद्देश्य को लेकर जिला निर्वाचन विभाग द्वारा गठित स्वीप कोषांग के जरिये मतदाता जागरूकता कार्यक्रम को काफी अहमियत दी जा रही है. इस कार्यक्रम को लेकर अब तक जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक रैली, प्रभातफेरी, मानव श्रृंखला आयोजित कर जहां मतदाताओं को उनके एक वोट के महत्व को लेकर मजबूत लोकतंत्र की स्थापना के लिए उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जागरूक किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर स्थानीय पंचकोसी सांस्कृतिक मंच व जिला लोक शिक्षा समिति के कलाकार रंगकर्मी ‘बदल गया जमाना’ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से चारों विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग जागरूकता कार्यक्रम से मतदाताओं को पांच नवम्बर को होने वाले मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं. स्वीप कोषांग के नोडल पदाधिकारी सह डीडीसी दारोगा प्रसाद यादव व प्रभारी पदाधिकारी चंद्रप्रकाश के नेतृत्व में कलाकारों के जत्था द्वारा आयोजित नुक्कड़ नाटक जागरूकता से मतदाता भी अपने वोट के महत्व को समझ मतदान में अपनी सहभागिता जरूर निभाने की बात कही है. जिला लोक शिक्षा टीम लीडर इंद्रदेव कुमार, अमिर राम व पंचकोसी के संयोजक अभय कुमार व अमित कुमार जयजय के नेतृत्व में कलाकारों के जत्था में पंचकोसी के सुमित वर्मा, ऋषभ राज, राधेश्याम, निशा रानी, धर्मेन्द्र, मिथुन, अखिलेश, जयप्रकाश, राहुल, विपिन, चंदन, मंतोष, पूनम, जीतू, धर्मेन्द्र, नेहरू युवा केन्द्र के युवा कोर सदस्य विकास भारती, श्वेता कुमारी सहित अन्य शामिल हैं. फोटो- नाटक 16 – ग्रामीण क्षेत्र में मतदान के लिए प्रेरित करते कलाकार
सुनअ हो भैया सुन गे बहिना, एक वोट के मिलल अधिकार हो
सुनअ हो भैया सुन गे बहिना, एक वोट के मिलल अधिकार हो सब काम छोड़, पहिले करिहं अपन मतदान होनुक्कड़ नाटक की टीम मतदान के लिए लोगों को किया प्रेरितप्रतिनिधि, सहरसा सदर जिले के कलाकार अपने गीत-संगीत व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को एक वोट के महत्व को लेकर जागरूक कर रहे हैं. […]
