इंसान बन गये चौक -चौराहों की पहचान

इंसान बन गये चौक -चौराहों की पहचान प्रभात खासक्या आप जानते हैं चौराहों से गुजरने वाले रास्ते का इतिहासनई पीढ़ी को नहीं है चौराहों के इतिहास की जानकारीकुमार आशीष, सहरसा नगरघूम कर देखो, धरती पर सब आते हैं मेहमान, चौक -चौराहों का नहीं बदल रहा इमान… कवि की यह पंक्ति कोसी प्रमंडल के मुख्यालय में […]

इंसान बन गये चौक -चौराहों की पहचान प्रभात खासक्या आप जानते हैं चौराहों से गुजरने वाले रास्ते का इतिहासनई पीढ़ी को नहीं है चौराहों के इतिहास की जानकारीकुमार आशीष, सहरसा नगरघूम कर देखो, धरती पर सब आते हैं मेहमान, चौक -चौराहों का नहीं बदल रहा इमान… कवि की यह पंक्ति कोसी प्रमंडल के मुख्यालय में अवस्थित चौक – चौराहों पर सटीक बैठती है. समय के साथ शहर का स्वरूप बदलता गया. लेकिन इन चौराहों की पहचान कायम रही. सबसे खास बात यह है कि इन जगहों का नामांकरण दशकों पूर्व किसी खास व्यक्ति की पहचान व उनके कृत्यों के बूते हो गयी थी. जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी लोग अपनाते गये. लेकिन अब आलम यह है कि नयी पीढ़ी को यह पता ही नहीं है कि जिन रास्ते या चौक चौराहों से वे गुजरते हैं, ठहरते हैं या देर तक अपने दोस्तों के साथ हंसी ठिठोली करते हैं, उसका नाम कैसे पड़ा…बंफर चौक- शहर के गंगजला मोहल्ले में स्थित बंफर चौक की पहचान पूरे जिले में है. ज्ञात हो कि लगभग तीस वर्ष पहले लगमा गांव के निवासी प्रमोद झा ने इस चौक पर मिठाई की एक दुकान खोली थी. उनके दुकान में निर्मित होने वाले बंफर रसगुल्ले की ख्याति दूर-दूर तक पहुंचने लगी. वर्तमान में प्रमोद झा के निधन के बाद उस चौक से बंफर रसगुल्ला का रिश्ता भी समाप्त हो गया. लेकिन बंफर चौक की पहचान कायम है. फोटो- चौक 5रहमान चौक – शहर के पूरब भाग में रहमान चौक अवस्थित है. इस चौक पर प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ए रहमान अपना अस्पताल चलाते हंै. दशकों से लोग इसे रहमान चौक के नाम से जानते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि डॉ रहमान का व्यक्तित्व इतना विशाल रहा है कि बरबस ही लोग इस चौक को रहमान चौक कहने लगे. फोटो- चौक 6 आरपी यादव चौक- शहर के नया बाजार में डॉक्टरों की दर्जनों क्लीनिक व नर्सिंग होम है. इसी मोहल्ले में डॉ आरपी यादव रहते थे. जो अपने आवास पर अस्पताल भी चलाते थे. बाद के समय में डॉ यादव की मृत्यु हो गयी. जिसके बाद उनके परिवार के लोग दूसरी जगह रहने के लिए चले गये. उनका आवास भी बिक चुका है. लेकिन डॉ यादव की लोकप्रियता का आलम यह है कि उनके नहीं रहने के बावजूद आरपी यादव चौक डॉक्टर साहब की मौजूदगी बनाये हुए है.फोटो- चौक 7रिफ्यूजी चौक – वर्ष 1971 को पाकिस्तान में हुए मुक्तिवाहिनी संघर्ष के दौरान बंगलादेश के गठन से पूर्व हुए दंगों में शरणार्थी भारत आये थे. उसी में से सैकड़ों परिवार शहर के बनगांव रोड में रिफ्युजी की तरह निवास करने लगे. जिसके बाद सरकार के स्तर से इन लोगों को ठिकाना उपलब्ध कराया गया था. वर्तमान में शहर का यह व्यस्तम चौक रिफ्युजी चौक के नाम से चर्चित है. फोटो- चौक 8तिवारी टोला चौक – मिथिला क्षेत्र में दशकों पूर्व दूसरे प्रदेश के कानकुज ब्राह्मणों का प्रवेश हुआ था. जिसमें कुछ लोग नरियार व चांदनी चौक पर बस गये. इन्हीं में से अधिकांश लोगों ने शहर के पूरब क्षेत्र में रहने का मन बनाया. धीरे-धीरे आबादी भी बढ़ती गयी. शहर इनलोगों के दरवाजे तक पहुंचने लगा. एनएच निर्माण के बाद इनलोगों की जमीनों की कीमत बढ़ने लगी. संख्या का अनुपात देखते तिवारी टोला मोहल्ले से गुजरने वाले चौक का नामांकरण स्वत: हो गया. फिलवक्त शहर का मुख्य व्यवसायिक केंद्र व शिक्षण संस्थान होने के बावजूद तिवारी टोला की पहचान कायम है. फोटो- चौक 9

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >