दुर्गा सप्तशती के पाठ से गुंजायमान है क्षेत्र

मंदिरों सहित घरों में नियमित हो रहा दुर्गा पाठ सहरसा: दुर्गापूजा के मौके पर जिले के शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्र पूरी तरह भक्ति के उमंग में सराबोर हो चुके हैं. महिषी स्थित उग्रतारा स्थान व कहरा प्रखंड के बनगांव स्थित भगवती स्थान, सोनवर्षाराज के चंडी स्थान सहित अन्य जगहों पर चौबीस घंटे स्थानीय पुरुष […]

मंदिरों सहित घरों में नियमित हो रहा दुर्गा पाठ

सहरसा: दुर्गापूजा के मौके पर जिले के शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्र पूरी तरह भक्ति के उमंग में सराबोर हो चुके हैं. महिषी स्थित उग्रतारा स्थान व कहरा प्रखंड के बनगांव स्थित भगवती स्थान, सोनवर्षाराज के चंडी स्थान सहित अन्य जगहों पर चौबीस घंटे स्थानीय पुरुष व महिलाओं सहित बच्चों द्वारा दुर्गासप्तशती का पाठ किया जा रहा है. इसके अलावा लोगों द्वारा अपने घरों में भी कलश स्थापना कर स्वयं व पंडितों से दुर्गा स्तुति का पाठ करवा माता की आराधना की जा रही है.

सप्तशती पाठ का महत्व

शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ की प्रधानता रहती है. इसमें कुल 13 अध्यायों में सात सौ मंत्र संकलित होते हैं. सप्तशती तीन चरित्रों में विभक्त हैं. प्रथम चरित्र के प्रथम अध्याय में ¬षि ब्रrा व महाकाली देवता हैं. मध्यम चरित्र में द्वितीय अध्याय से चतुर्थ अध्याय तक ¬षि विष्णु व महालक्ष्मी देवता हैं. उत्तर चरित्र में पांचवें अध्याय से 13वें अध्याय तक ¬षि शिव व महासरस्वती देवता हैं. उक्त आध्यात्मिक ग्रंथ में चंड-मुंड, शुंभ-निशुंभ व रक्तबीज सदृश भयानक असुरों के वध का आख्यान भरा है. इसमें मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा भगवती के महत्व को दर्शाया गया है. सभी देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र देकर महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती स्वरूपा दुर्गा को सुसज्जित कर असुरों का वध कर देवताओं सहित मानवों की रक्षा के लिए प्रार्थना की है.

दुर्गा सप्तशती का पाठ शारदीय नवरात्र में अत्यंत फलदायी होता है. पंडितों का कहना है कि नवरात्र एक संक्रमण काल होता है और इस में किया गया धार्मिक अनुष्ठान, पूजापाठ अक्षुण्ण होकर फलीभूत होता है.

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