कोसी में तो लालू कार्ड ही चलेगा

मधेपुरा: अंतत: चारा घोटाले के एक मामले में आरोपी लालू यादव को सजा हो ही गई. इस घटना ने राजद के भविष्य और उसकी योजनाओं पर प्रश्नचिन्ह तो लगा ही दिया है, साथ ही कांग्रेस को भी बिहार में अपना नया साथी चुनने को मजबूर कर दिया है. जो भी हो लालू यादव भारतीय राजनीति […]

मधेपुरा: अंतत: चारा घोटाले के एक मामले में आरोपी लालू यादव को सजा हो ही गई. इस घटना ने राजद के भविष्य और उसकी योजनाओं पर प्रश्नचिन्ह तो लगा ही दिया है, साथ ही कांग्रेस को भी बिहार में अपना नया साथी चुनने को मजबूर कर दिया है. जो भी हो लालू यादव भारतीय राजनीति में एक सामाजिक न्याय एवं धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार के रूप में उभरे थे. इन्होंने पिछड़े और दबे लोगों की जुबान में ताकत दी. जब महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के साथ अत्याचार हो रहा था तो लालू यादव ने इस मुद्दे को कैबिनेट में पूरे जोश के साथ उठाया था और गृह मंत्री को इस पर कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया था. लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दे कर लालू यादव ने देश की धर्म आधारित राजनीति को कमजोर किया था. हालांकि लालू यादव ने जब मंडल बनाम कमंडल का नारा दे कर पिछड़ों को अधिकार देने की आवाज उठाई तो समाजवादी पृष्ठभूमि वाले कोसी क्षेत्र में व्यापक प्रभाव पड़ा. हालांकि इसके बहुत सारे रूपों में दुष्परिणाम भी सामने आये. मधेपुरा क्षेत्र से कई सवर्ण परिवार पलायन कर गये. परिणाम यह हुआ कि जाति विशेष का वर्चस्व आपराधिक रूप से सामने आया. हालांकि विवि शुरू करने और रेल विद्युत इंजन कारखाना बनाने की घोषणा के कारण लालू इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

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