सहरसा मुख्यालय: बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के चौथी बार शपथ लेते ही जिले के खास सहित आम लोगों में खुशी छा गयी है. जिले के हर एक व्यक्ति ने नीतीश से काफी अधिक अपेक्षाएं पाल रखी हैं. वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि नीतीश कुमार को अपना पहला पंचवर्षीय स्वर्णकाल लौटाना चाहिए. 2005 से 2010 तक के कार्यकाल में राज्य को जो ऊंचाई मिली थी.
वह एक बार फिर लौटे, यही अपेक्षा और विश्वास है. राजनैतिक हो या गैर राजनैतिक, सामाजिक हो या सांस्कृतिक, महिला हो या पुरुष, हर क्षेत्र के लोग नीतीश कुमार के एक बार फिर सीएम बनने से उत्साहित हैं. वे कहने लगे हैं कि नीतीश के लौटने के साथ ही अब राज्य की खोती जा रही प्रतिष्ठा भी शीघ्र वापस लौटेगी. प्रदेश में एक बार फिर से विधि-व्यवस्था पर नियंत्रण होगा. यहां कानून का राज स्थापित होगा. गोलीबारी की घटना, जो आम हो चुकी है. वह एक बार फिर बीते दिनों की कहानी में शामिल हो जायेगी.
होगी विकास की बातें
अपराधी या तो अपराध से तौबा करेंगे या बिहार छोड़ कर जायेंगे. एक बार फिर यहां सिर्फ और सिर्फ काम के साथ विकास की बातें होगी. गृहिणी कविता देवी कहती है कि ‘फिर एक बार नीतीश कुमार’ का सपना तो पूरा हुआ. लेकिन उनके पहले स्वर्णकाल का इंतजार है, जब महिलाएं आत्मगर्वित हुआ करती थी. वहीं गुड़िया देवी का मानना है कि नीतीश कुमार की प्रेरणा व नीति के कारण ही प्रदेश की महिलाओं ने घर के आंगन से कदम बाहर निकाला. महिलाओं के लिए 50 फीसदी का आरक्षण, लड़कियों की साइकिल की सवारी सब इन्हीं की देन है. अंदर दुबक चुके कदम के एक बार फिर बाहर आने की उम्मीद जगी है. छात्र अंकित कुमार कहता है कि नीतीश कुमार का सत्ता में लौटना अच्छी बात है. लेकिन यह वापसी तभी सफल होगी जब वे आमजनों की उम्मीदों पर पहली बार की तरह खरे उतरेंगे. दिलीप कुमार सिन्हा कहते हैं कि नीतीश कुमार ही पहले ऐसे सीएम हैं, जिनके दुबारा आने का इंतजार आम लोग भी कर रहे थे. इंतजार पूरा हुआ. अब पहले कार्यकाल की झलक का इंतजार है. अभिषेक कुमार कहते हैं कि नीतीश कुमार के द्वारा प्रथम काल में पटरी पर लायी गयी सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर बेपटरी हो गयी है. अफसरशाही सिर चढ़ कर बोलने लगा है. भ्रष्टाचार चरम पर है. नीतीश कुमार के लौटने से इन सभी व्यवस्थाओं पर लगाम लगने की उम्मीद बनी है.
फिर से लिखें विकास की इबारत
जदयू के पूर्व विधायक गुंजेश्वर साह ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार में सुशासन का दूसरा नाम है. इनके पहले कार्यकाल ने इतिहास रचा. कोसी क्षेत्र की भी कई अपेक्षाएं पूरी हुई. अभी भी विकास के बहुत काम बाकी हैं. नीतीश कुमार के नेतृत्व में निश्चय ही कोसी क्षेत्र का कायाकल्प होगा. पार्टी से जुड़े प्रो अरूण कुमार खां ने कहा कि नीतीश कुमार विकास के पर्याय हैं. इनके कार्यकाल में विकास की जितनी पटकथाएं लिखी गयी, शायद आजादी के बाद के किसी सीएम ने नहीं लिखी. इनके नेतृत्व में प्रदेश एक बार फिर इबारत की कहानियां लिखेगा. व्यवसायी गौतम केशरी ने कहा कि नीतीश के प्रथम शासनकाल ने राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को सुशासन की परिभाषा से जोड़ दिया था. उनसे एक बार फिर वैसे ही शासनकाल की अपेक्षा है.
