सहरसा नगर: सहरसा-मानसी रेलखंड पर परिचालित बड़ी लाइन व सहरसा-सुपौल रेलखंड की छोटी लाइन की ट्रेन में सफर के दौरान सुरक्षित यात्र के उद्देश्य को मखौल बनाते सैकड़ों लोग आपको प्रतिदिन नजर आ जायेंगे. खास बात यह है कि ट्रेन के कोच में जगह खाली होने के बावजूद लोग ट्रेन की छत व गेट के अलावा इंजन पर भी सवारी करते हैं.
इस तरह सफर करने वाले लोगों की वजह से इस रेलखंड पर दर्जनों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसका खमियाजा रेलवे के अलावा मृतक के परिजनों को भी भुगतना पड़ता है. चलती ट्रेन में ड्राइवर द्वारा अचानक ब्रेक लगाये जाने से छत व इंजन पर सफर करने वाले सवार अपना संतुलन खो देते हैं और असमय काल के गाल में समा जाते हैं.
वयस्क भी करते हैं नादानी
ट्रेन की छत पर सवारी करने वाले अधिकांश लोग वयस्क होते है. इन लोगों की देखादेखी बच्चे भी ट्रेन के गेट पर लटक रफ्तर को चुनौती देते हैं. इस प्रकार की सबसे ज्यादा हरकत छोटी लाइन की ट्रेनों में देखी जाती है.
इंजन पर भी करते हैं सवारी
सुपरफास्ट राज्यरानी व इंटरसिटी एक्सप्रेस की इंजन पर भी छात्र अक्सर सफर करते हैं. ऐसा हरकत करने वालों पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है. बीते वर्ष की बात करें तो इंजन से गिरने के कारण ही कोपरिया के समीप स्कूली छात्र की मौत हो गयी थी.
करो अपनो की फिक्र
आरपीएफ इंस्पेक्टर रूपेश कुमार कहते हैं कि ट्रेन के छत व इंजन पर यात्र करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है. जिसमें जुर्माना व सजा का भी प्रावधान है. सफर कर रहे लोगों को चलती ट्रेन व असुरक्षित यात्र से परहेज करना चाहिए. घर से बाहर निकलने पर हमेशा घर में इंतजार कर रहे परिजनों का ख्याल करना चाहिए.
