18 वर्ष में इस महत्वपूर्ण योजना को सरजमीन पर नहीं उतारा जा सका
नये साल के लिए मुद्दा रह गया बरकरार
सहरसा : ..और 18वां साल 2014 भी बीत गया. बंगाली बाजार में ओवरब्रिज निर्माण कार्य शुरू होता देखने के लिए लोगों की पलकें बिछी ही रह गयी, लेकिन मिट्टी जांच के बाद निर्माण कार्य शुरू नहीं ही हो पाया.
अब तक तीन शिलान्यास का गवाह बन चुका यह ओवरब्रिज छोटे से बड़े नेताओं का मुद्दा भर बन कर रह गया है. चुनावी घोषणा पत्र में पहले नंबर पर छपने वाला यह मुद्दा जीतने वाले प्रतिनिधि के लिए आश्वासन देने तो हारने वालों के लिए जीते को ललकारने का विषय बना रहा. संभवत: संपूर्ण राज्य में यही एक योजना है जो जनप्रतिनिधि की लापरवाही के कारण 18 वर्ष बाद भी जमीन पर नहीं उतारा जा सका और हास्यास्पद बना रहा.
पप्पू ने दिलाया था भरोसा
सबसे अधिक धरना, प्रदर्शन, जुलूस व अनशन जैसे आंदोलनों का गवाह बना यह अनिर्मित आरओबी किसी की संवेदना को जगा नहीं सका. बीते अक्तूबर महीने में प्रवीण आनंद के अनशन को मधेपुरा सांसद पप्पू यादव ने यह कहते समाप्त करवा दिया था कि संसद के शीतकालीन सत्र के ठीक बाद वे रेलमंत्री सहित विभाग से मिल इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू कराने की दिशा में काम करेंगे. सत्र समाप्ति के बाद क्षेत्र लौटने पर परिसदन में हुई प्रेसवार्ता में पप्पू ने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए लिए बनने वाले रेल बजट में वे अधिक से अधिक राशि उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे. पप्पू के बयानों के साथ ही इस साल की आशाएं समाप्त हुई और नये साल के लिए यह मुद्दा और निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीदें बरकरार रह गयी.
