मानसून आने से तटबंध की खुली पोल

महिषी : स्वतंत्रता प्राप्त के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में स्थानीय लोगों को बाढ़ की विभीषिका से उत्पन्न नारकीय स्थिति से निजात दिलाने की मंशा से कोसी की चंचल व निश्छल धाराओं को दो तटबंधों के बीच सहेज कर प्रवाहित किया गया. वर्ष 1984 में नवहट्टा प्रखंड के हेमपुर व वर्ष […]

महिषी : स्वतंत्रता प्राप्त के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में स्थानीय लोगों को बाढ़ की विभीषिका से उत्पन्न नारकीय स्थिति से निजात दिलाने की मंशा से कोसी की चंचल व निश्छल धाराओं को दो तटबंधों के बीच सहेज कर प्रवाहित किया गया. वर्ष 1984 में नवहट्टा प्रखंड के हेमपुर व वर्ष 2009 में कुसहा में पूर्वी कोसी तटबंध के टूटने से लाखों की आबादी की जान माल की क्षति हुई

अरबों की राशि का नुकसान हुआ व कई गांव विस्थापित हुए. प्रदेश सरकार के द्वारा तटबंध के ऊंचीकरण, सुदृढ़ीकरण के लिए 365 करोड़ की राशि आवंटित की गयी. मेसर्स वशिष्ठा कंस्ट्रक्शन को संविदा के माध्यम से कार्य का जिम्मा मिला.

मालूम हो कि निर्माण कंपनी के द्वारा कोसी के रेतों से तटबंध का ऊंचीकरण किया गया. जानकारी के अनुसार तटबंध के ऊपरी हिस्सों में मिट्टी का प्रयोग व दोनों किनारों में घास बिछाकर तटबंध की सुरक्षा करने की व्यवस्था की जानी थी. लेकिन विभागीय अधिकारियों की अनदेखी व संवेदक की मनमानी के कारण ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

89 किलोमीटर महिसरहो से 103 किलोमीटर गेमरोहो के बीच मानसून के पहले झटके में दर्जनों रेनकट ने तटबंध की मजबूतीकरण को उजागर कर दिया है. नदी के जल स्तर में लगातार हो रही वृद्धि व तटबंध की स्थिति को देख तटबंध के पूर्वी हिस्सों में अवस्थित ग्रामीणों को तटबंध टूटने की आशंका सताने लगी है.

इस बाबत कार्यपालक अभियंता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि तटबंध पर बने रेनकटों को शीघ्र भरने के लिए संवेदक को पत्र लिखा गया है. शीघ्र ही मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जायेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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