* आक्रामक हुए आदिवासी, जमीन खाली नहीं करने पर अड़े, इलाके में तनाव
सहरसा/ सत्तरकटैया : जिले के बरहसैर कुम्हारा घाट में दिन-ब-दिन किसानों की जमीन पर कब्जा जमाये बैठे आदिवासियों की दबंगई बढ़ती ही जा रही है. मंगलवार को दूसरे दिन रैयती जमीन को खाली कराने सदल बल पहुंचे सदर एसडीओ शंभुनाथ झा व एसडीपीओ अशोक कुमार दास को आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा वापस लौटा दिया गया.
बढ़ते दबाव के कारण आदिवासी समुदाय में आक्रोश बढ़ रहा है. इसका नतीजा एसडीओ व एसडीपीओ के वहां मौजूद रहने के दौरान दिखा. मंगलवार को लगभग दो सौ की संख्या में आदिवासी धनुष, तीर, दबिया, गंड़ासा, भाला लेकर किसी भी स्थिति से निबटने को तैयार दिख रहे थे, जिसे अधिकारियों ने भांप लिया और वहां से निकल आये.
जबरन बसे आदिवासियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें स्थायी रूप से बसने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करायी जायेगी, तब तक वे इस जमीन को खाली नहीं करेंगे.
आदिवासियों के इस रवैये से पूरे गांव में आतंक व अनहोनी की संभावना बनी हुई है. रैयत को हाथ से जमीन निकलने का भय बना हुआ है, वहीं गांव के सामान्य लोगों को इनके टकराव की संभावना से बड़े हादसे का डर सताने लगा है.
स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा जमीन कब्जा किये आदिवासियों को समझाने के बाद दूसरे दिन सुबह से ही गांव में तनाव की स्थिति बनी रही. मंगलवार को आदिवासियों का समूह दो भागों में सारी स्थिति से निबटने के लिए तैयार दिख रहा था.
कब्जा किये जमीन की कमान आदिवासी महिला संभाल रही थी, जबकि नदी के पार पुरुष हरबे-हथियार से लैस पूरी तरह तैयार बैठे थे. आदिवासी समाज की महिलाएं अधिक उग्र नजर आ रही थीं. जिले को छोड़ अन्य जगहों से आकर जमीन कब्जा करने वाले लोग भी अपना पता अब सहरसा ही बताने लगे हैं. इन कब्जा करने वालों का हौसला इतना बुलंद था कि पुलिस के सामने वे जमीन पर बांस के खूंटे व छप्पर चढ़ा रहे थे.
गांव के चंद्रशेखर खां, बेदो ठाकुर, उपेंद्र ठाकुर व जितेंद्र ठाकुर ने बिहरा थाना में आवेदन देकर अपनी एक एकड़ खेती योग्य जमीन पर पारंपरिक हथियारों से लैस लोगों द्वारा जबरन कब्जा कर लिये जाने की शिकायत की थी, जिसके बाद क्षेत्र में व्याप्त तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उक्त जमीन को खाली कराने का निर्देश दिया गया था. एसडीओ श्री झा ने बताया कि आदिवासियों द्वारा जमीन खाली कराने के एवज में बासगीत परचा की मांग की जा रही थी.
इधर स्थिति की गंभीरता को देखते जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक स्थानीय थाना पहुंचे, जहां अधिकारियों द्वारा स्थिति पर निगाह रख आदिवासियों को वहां से हटाने के विकल्प के बारे में सोच विचार किया जा रहा था. उसके बाद बताया गया कि डीएम द्वारा वर्तमान मुखिया मनोरंजन पांडेय एवं पूर्व मुखिया चंद्रशेखर ठाकुर को आदिवासियों से बात कर समझाने के लिए राजी कराने को कहा गया है.
* जमीन खाली कराने की रणनीति बनाने में जुटा प्रशासन
सत्तर कटैया : सैकड़ों की संख्या में रैयती जमीन पर कब्जा कर झोपड़ी बनाये आदिवासियों को जमीन खाली कराने के बदले बिहरा थाना में बैठ कर प्लानिंग करता रहा. जिला प्रशासन स्थानीय थाना पुलिस के नाकामी व सदर एसडीओ शंभु नाथ झा व डीएसपी अशोक कुमार दास के बेरंग लौटने के बाद डीएम शशिभूषण कुमार व एसपी अजीत सत्यार्थी जिला व प्रखंड प्रशासन के साथ जमीन खाली कराने के बजाय थाना में बैठ कर प्लानिंग करते नजर आये.
हकीकत तो यह कि पूर्णिया की घटना को याद कर अप्रिय आशंका जिला प्रशासन को भी सताने लगा है. प्लानिंग कर रहे डीएम ने बताया कि मामला काफी सेंसेटिव है. शांतिपूर्ण तरीके से जमीन खाली कराने की ओर कार्यवाही की जा रही है. वही एसपी अजीत कुमार सत्यार्थी ने कहा कि जमीन खाली कराने के पर्याप्त पुलिस बल की आवश्यकता है. जिला प्रशासन इस कार्य में सजगता पूर्वक लगा है. डीएम ने पंचायत के मुखिया मनोरंजन पांडेय व भूत पूर्व मुखिया चंद्रशेखर ठाकुर को आदिवासी से मिल कर वार्ता करने को कहा है.
