सात पंचायत के हजारों लोग फिर से शुरू करेंगे जिंदगी

नवहट्टा : कोसी की बाढ़ से तटबंध के भीतर बसे प्रखंड के सात पंचायतों के डेढ़ दर्जन से अधिक गांव पूर्णत: प्रभावित हैं. इनमें से अधिकतर गांव के लोगों को पलायन करने की स्थिति बन गयी थी और वे तटबंध के बाहर आ गये. लगातार बारिश एवं कोसी बराज से अत्यधिक मात्रा में जल निस्सरित […]

नवहट्टा : कोसी की बाढ़ से तटबंध के भीतर बसे प्रखंड के सात पंचायतों के डेढ़ दर्जन से अधिक गांव पूर्णत: प्रभावित हैं. इनमें से अधिकतर गांव के लोगों को पलायन करने की स्थिति बन गयी थी और वे तटबंध के बाहर आ गये. लगातार बारिश एवं कोसी बराज से अत्यधिक मात्रा में जल निस्सरित किये जाने से पानी ने लगभग सातों पंचायतों को डूबो दिया था.

लगभग हर घर के चूल्हे में पानी चले जाने से उन्हें गांव छोड़ना पड़ा था. हालांकि अगले ही दिन से डिस्चार्ज में एकाएक काफी कमी आई और नदी के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गयी.
लेकिन बीते रविवार को पहुंचे पानी ने जो बर्बाद कर दिया, उसे पूरा होने में वर्षों लग जायेंगे. कई गांवों की मिट्टी खंगाल दी तो कई गांव के घरों को पानी साथ बहा ले गयी. कई कच्चे घरों को गिरा दिया तो कई पक्के घरों की दीवार दरक गयी. घर में रखे अनाज, कपड़े, कागजात सब भींग कर बर्बाद हो गये, कई एकड़ में लगी धान की फसल भी नदी की भेंट चढ़ गयी.
सात पंचायत के दस हजार से अधिक एकड़ में लगे धान का फसल बर्बाद हो गया. इसके अलावे कई लोगों के ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, आटा चक्की मिल में भी पानी जाने से काफी क्षति हुई है. नदी की विकराल स्थिति के कारण लोगों को गांव छोड़ने के लिए निजी स्तर पर नाव की व्यवस्था करनी पड़ी. उन्हें दो हजार रुपये प्रति फेरे देने पड़े.
गांव में जब पानी घट जायेगा तो वे वापास होंगे. तब भी उन्हें नाव वालों को इतने ही रुपये देने होंगे. इसके अलावे घर से बाहर रहने व बाजार से खरीद कर खाने में भी बेवजह उनका खर्च हो रहा है. मवेशियों को चारे भी अभी खरीद कर खिलाना पड़ रहा है. नवहट्टा बाजार में शरण ले रहे बाढ़ पीड़ित प्रभु पंडित ने कहा कि प्रतिदिन डेढ़ हजार रुपये की दर से खर्च हो रहा है. पता नहीं, गांव से पानी कब निकलेगा और हम वापस अपने घर कब जा पायेंगे.

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