अस्पताल में चर्मरोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मरीजों को हो रही कठिनाई
सिमरी : बदलते मौसम के साथ ही अस्पताल में उल्टी, दस्त व मौसमी बुखार के मरीजों की संख्या में तो इजाफा हो ही रहा है. लेकिन इसके साथ-साथ सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में भी चर्म रोगों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होनी शुरू हो गयी है. बात करें सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल की, तो यहां अस्पताल में चर्मरोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है. मरीजों ने अस्पताल में चर्मरोग विशेषज्ञ चिकित्सक नियुक्ति की जाने की मांग की है.
महंगे दवाई भी हो रहे है बेअसर: निजी क्लिनिक के डॉक्टरों के मुताबिक चर्मरोग से संबंधित हर रोज एक से डेढ़ दर्जन मरीज इलाज कराने क्लिनिक पहुंच रहे हैं. वहीं बदलते मौसम की वजह से यह संख्या दो से ढाई दर्जन तक पहुंच गयी है. चर्म रोग विशेषज्ञ की माने तो ज्यों-ज्यों गर्मी अपना रंग दिखाना शुरू करेगी. त्यों-त्यों मरीजों की संख्या में भी इजाफा होता चला जायेगा. चर्म रोग में विशेषकर फंगल नामक बीमारी के मरीज अधिक आ रहे हैं. इसके साथ-साथ धूप में स्किन का रंग बदलना, खाज-खुजली, धूल मिट्टी से एलर्जी, फसलों से कटाई व कढ़ाई से निकलने वाले धूलकणों से होने वाली एलर्जी के मरीज आ रहे हैं. लेकिन सबसे अधिक मरीजों की संख्या की बात की जाये तो वो फंगल नामक बीमारी के ही मरीज आ रहे हैं. वहीं चर्मरोग के मरीजों ने बताया कि एक बार हो जाने के बाद ये दाद, खाज , खुजली ठीक भी नहीं होते और महंगी दवाइयां भी बेअसर साबित होती है.
बचाव के तरीके
सूती व हवादार कपड़े पहनने चाहिए, धूप में कम निकला जाए
-फंगल बीमारी के मरीजों को जूतों से परहेज, शरीर को धूल कणों, धूप आदि से बचाना चाहिए. शरीर को अधिक से अधिक ठंडा रखें, शरीर में पसीने नहीं आने दे. पौष्टिक आहार का अधिक से अधिक सेवन किया जाना चाहिए.
गर्मियों में सबसे अधिक चर्म रोग सूरज की किरणों से होता है. इसके साथ-साथ धूलकण आग में घी का कार्य करते हैं. अक्सर आम जन चर्मरोगों को हल्के रोग के रूप में लेता है. साथ ही गांवों में ग्रमीण किसी भी चिकित्सक से दवा लेकर शरीर पर किसी भी प्रकार की क्रीम आदि का प्रयोग कर लेते हैं. जिसके कारण रोग घटने की बजाये शरीर में बढ़ने लग जाता है. मरीजों को चर्मरोग को हल्के में नहीं लेना चाहिए, त्वचा में थोड़ी सी शिकायत होने पर केवल चर्म रोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही दवा लें, ताकि बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके.
डॉ प्रमोद कुमार, चिकित्सक
