विश्वास का धंधा न करें भगवान

शोषण. मरीज उपभोक्ता, तो डॉक्टर को सेवा प्रदाता मानने लगे हैं लोग केस स्टडी 1 चौधरी आइ केयर नाम से डीबी रोड आयुर्वेदिक कॉम्प्लेक्स में डॉ सीबी चौधरी के द्वारा आंख का अस्पताल चलाया जाता है. अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की सूची गेट पर ही डिस्प्ले कर दी गयी है. लेकिन किस प्रकार की सुविधा […]

शोषण. मरीज उपभोक्ता, तो डॉक्टर को सेवा प्रदाता मानने लगे हैं लोग

केस स्टडी 1
चौधरी आइ केयर नाम से डीबी रोड आयुर्वेदिक कॉम्प्लेक्स में डॉ सीबी चौधरी के द्वारा आंख का अस्पताल चलाया जाता है. अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की सूची गेट पर ही डिस्प्ले कर दी गयी है. लेकिन किस प्रकार की सुविधा व जांच में आने वाले खर्च का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है. रेट लिस्ट को लेकर प्रबंधन संजीदा नजर नहीं आ रहा है. अस्पताल में मरीज आंख में होने वाले विभिन्न प्रकार के मर्ज के उपचार के लिए पहुंचते है. अस्पताल में पावर का चश्मा भी मरीजों को चिह्नित दुकान से ही लेने के लिए कहा जाता है.
केस स्टडी 2
नया बाजार में संचालित हो रहे आरोग्य मंदिर हॉस्पिटल में अपातकालीन सेवा उपलब्ध है. अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ अभिषेक कुणाल सर्जन है. वहीं डॉ अर्चना स्नेहा महिला रोग विशेषज्ञ हैं. अस्पताल में कमोबेश सभी प्रकार के मर्ज को लेकर रोगी पहुंचते है. अन्य कई चिकित्सक यहां अपनी सेवा दे रहे हैं. जिनका नाम बोर्ड पर डिस्प्ले किया गया है. रेट लिस्ट यहां भी नहीं लगाया गया है. मरीज को जांच की सुविधा दी जाती है. अस्पताल में रविवार को फ्री ओपीडी की व्यवस्था की गयी है. जिसकी लोग तारीफ करते हैं. लेकिन रेट लिस्ट नहीं होना मरीज को खटकता है.
केस स्टडी 3
नया बाजार में संचालित हो रहे उमा स्वास्थ्य सदन नाम से एक नर्सिंग होम में लगे बोर्ड पर कई डॉक्टरों द्वारा सेवा दिये जाने की जानकारी डिस्प्ले की गयी है. जिसमें डॉ बी के सिंह, डॉ कुमार संदेश, डॉ विरेंद्र व डॉ संतोष कुमार शामिल हैं. सभी प्रकार के शल्य चिकित्सा की बात परिजनों ने बतायी है. रेट लिस्ट से डॉक्टर साहब का कोई सरोकार नहीं है. अस्पताल में रेट लिस्ट नहीं रहने पर अनापशनाप भुगतान की मजबूरी है. यह बातें मरीज के परिजन बताते है. लोगों ने कहा कि सभी निजी अस्पताल में रेट लिस्ट सार्वजनिक किया जाये.
सहरसा : मरीज के परिजनों ने अस्पताल में तोड़-फोड़ की, मरीजों के परिजनों ने नर्सिंग होम के शीशे तोड़े, परिजन और डॉक्टर में विवाद, डॉक्टर ने रोगी को जबरन अस्पताल से निकाला, पूरा पैसा नहीं जमा करने पर अस्पताल ने मरीज के सर्जरी से इनकार किया, पैसा न मिलने पर नर्सिंग होम ने मरीज को अस्पताल में भरती करने से मना किया, इलाज में लापरवाही से प्रसूता की जान गयी. यह सुर्खियां आज-कल अखबार एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आम है. यह एक उदाहरण भर की बातें है, स्थितियां इससे भी ज्यादा गंभीर हैं. चिकित्सा क्षेत्र की
प्रतिबद्धता और प्रमाणिकता एवं पारदर्शिता आदि सवालों के घेरे में है. पुराने जमाने में भगवान का रूप समझे जाने वाले चिकित्सक के प्रति मरीजों एवं समाज का रवैया बिल्कुल बदला हुआ है. इसके लिए केवल रोगी ही जिम्मेदार नहीं है कहीं न कहीं चिकित्सकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है. चिकित्सकों में सामाजिक सरोकार की कमी, उनकी व्यवसायिक सोच के कारण आज रोगी केवल चिकित्सक को सेवा प्रदाता मानने लगा है. वह चाहता है कि उसने चिकित्सक को अपने इलाज के लिए पैसा दिया है तो उसके द्वारा चुकायी गयी फीस का पूरा प्रतिफल मिलना चाहिए. और जब रोगी और उसकी देखभाल करने वालों को लगता है कि अस्पताल और चिकित्सक द्वारा उसकी सही देखभाल नहीं की जा रही है,
उसके इलाज में लापरवाही बरती जा रही है तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है. वे मारपीट, तोड़-फोड़, हाथापाई और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं. एक बात यह भी माननी होगी समाज में न तो सारे चिकित्सक सामाजिक सरोकारों से दूर हैं और न ही सारे रोगियों ने चिकित्सक को भगवान मानना बंद कर दिया है. अस्पताल में रेट लिस्ट सार्वजनिक करने से रोगी भी संतुष्ट होगा. चिकित्सक धन व व्यवसाय का लोभ छोड़ कर चिकित्सा कार्य को सेवा कार्य बनायें रखें, ताकि रोगियों में उनके प्रति विश्वास का संकट उत्पन्न न हो.
सुनिए डॉक्टर साहब जनता की आवाज
प्रभात खबर के हेल्पलाइन नंबर पर प्रतिक्रिया देते बिहरा बाजार के सुबोध कहते है कि अस्पताल में जांच के नाम पर ज्यादा पैसे लिये जाते हैं. इस पर भी लगाम लगनी चाहिए. डीबी रोड अनुराग गली के सूरज ने कहा कि नर्सिंग होम नॉर्मल डिलिवरी के नाम पर मरीज के परिजन को डरा कर सर्जरी कर देते हैं. ऐसे कई मामले सामने आये हैं. नरियार के रहमान ने कहा कि निजी क्लिनिक में सिर्फ डॉक्टर के दर्जनों नाम होते हैं. काम करते वक्त एक ही व्यक्ति नजर आते हैं. बलवाहाट के विभूति ने कहा कि निजी अस्पताल में गरीब का शोषण जांच व दवाई के अलावा भी होता है.
आपको भी किसी अस्पताल में हो रही है ऐसी परेशानी या देना चाहते हैं अपनी प्रतिक्रिया, हमें बताये :व्हाटस एप : 9431807274, मेल :kumarashishin85@gmail.com)

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >