कहने को प्रमंडलीय अस्पताल, सुविधा नहीं

अव्यस्था. लोगों को बाजार पर रहना पड़ता है निर्भर, मामूली जांच भी नहीं होती आने वाले मरीजों को मिलती है निराशा सहरसा : कोसी का प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल में बीमारी की मामूली सी जांच भी नहीं होती है. सुनने में भले ही यह अटपटा लग रहा हो, लेकिन यह सच है. […]

अव्यस्था. लोगों को बाजार पर रहना पड़ता है निर्भर, मामूली जांच भी नहीं होती

आने वाले मरीजों को मिलती है निराशा
सहरसा : कोसी का प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल में बीमारी की मामूली सी जांच भी नहीं होती है. सुनने में भले ही यह अटपटा लग रहा हो, लेकिन यह सच है. प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल में प्रतिदिन सहरसा के अलावे मधेपुरा, सुपौल, खगड़िया सहित अन्य जगहों के मरीज रेफर होकर या स्वयं बेहतर इलाज के लिए पहुंचते है. लेकिन यहां पहुंचने के बाद पछताने के अलावे उसके पास कोई चारा नहीं होता है. खासकर गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निराशा ही हाथ लगती है.
वहीं आर्थिक रूप से संपन्न लोग तो बाहर से भी अपनी जांच व दवाई की पूर्ति कर लेते हैं. ऐसी बात नहीं है कि इस बात की जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को नहीं है. जानकारी होने के बाद भी वह अनजान बने हुए हैं. जिसका परिणाम मरीज व उसके परिजनों को भुगतना पड़ता है. मालूम हो कि आपातकालीन कक्ष में प्रतिदिन दर्जनों मरीज व ओपीडी में सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं.
नहीं होता है प्रेगनेंसी टेस्ट : मामूली सी जांच प्रेगनेंसी टेस्ट भी अस्पताल के ओपीडी की ऊपरी मंजिल पर स्थित जांच घर में नहीं होती है. महिला डॉक्टर से सलाह लेने के बाद यदि आपको प्रेगनेंसी जांच के लिए कह दिया जाय तो आपको बाजार के ही किसी जांच घर में जाना पड़ेगा. अन्यथा पछताने के अलावे कोई चारा नहीं है. इसके अलावे यूरीन कल्चर की जांच भी नहीं होती है. जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जानकारी के अनुसार जांच के लिए कुछ दिन पूर्व कीट खरीद कर आया, लेकिन उसकी गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच के बाद उसमें कोई रिजल्ट नहीं आता था. जिसके बाद उसे वापस कर दिया गया. वापसी के बाद विभाग द्वारा अभी तक पुन: जांच किट नहीं भेजी गयी है.
इन टेस्टों का लगा है बोर्ड: सदर अस्पताल के पश्चिमी भाग स्थित ओपीडी के ऊपरी मंजिल पर बने जांच घर में जाने पर दीवार पर एक लंबी चौड़ी जांच की लिस्ट टंगी है. जिसको पढ़ने के बाद आप बाहर जाने की सोच भी नहीं सकते हैं, लेकिन कमरे के अंदर पहुंच कर पूर्जा देने के बाद आपको बाजार जाना मजबूरी बन जायेगी. यह हम नही बल्कि पूर्जा में लिखे जांच में आधा से अधिक जांच नहीं होने की बात कहने के बाद खुद अंदाजा लग जाता है. दीवार पर लिखित सूची के अनुसार हिमोग्लोबिन, टी सी, इएसआर, बीटी एंड सीटी, यूरीन, प्रेगनेंसी जांच, स्टूल, कालाजार, डेंगू, मलेरिया, एलडिहाइड, ब्लड सुगर, सीरियम बिलिरूबीन, एसजीपीटी, एसजीओटी, एएलपी, ब्लड यूरिया, सिरियम क्रेटिनिन, सीरियम यूरिक एसिड, सीरियम कैल्सियम, सीरियम यूरिक एसिड, सीरियम कोलस्ट्राल कुल 22 जांच होने की सूची टंगी है.
जांच घर में अत्याधुनिक मशीन है उपलब्ध
जांच घर अत्याधुनिक मशीन से लैस है. जानकारी के अनुसार जांच घर में दो सेमी ऑटोलाइजर मशीन व एक सीबीसी मशीन उपलब्ध है. वही मरीजों की जांच के लिए डॉ आरके पप्पू, चार टैक्निशियन मौजूद है. मरीजों की बात पर यकीन करें तो जांच रिपोर्ट उसी पूर्जा पर या कागज के टुकड़े पर लिख कर दिया जाता है. जिसपर किसी का हस्ताक्षर नहीं होता है. परिजनों के अनुसार जिसके कारण जांच रिपोर्ट अन्य जगहों पर मान्य नहीं होता है.

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