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रोहतास में देखरेख के अभाव में सूख गए मनरेगा से लगे 20 फीसदी पौधे, जानें क्या बोले प्रोग्राम पदाधिकारी

रोहतास के करमैनी पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर मात्र 400 पौधे लगाये गये. इसमें से 360 पौधे जीवित हैं . उदयपुर पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर 2214 लगे, जिनमें 1540 जीवित बचे हैं.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदते मजदूर
पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदते मजदूर
फाइल फोटो

संझौली. सरकार की कल्याणकारी योजना ' पौधा लगाओ पर्यावरण बचाओ ' के तहत संझौली प्रखंड में वित्तीय वर्ष 2021-22 में 11000 पौधे लगाये गये थे. इनमें से करीब 20 प्रतिशत पौधे पानी और देखरेख के अभाव में सूख गये. मनरेगा के तहत निजी व सार्वजनिक दोनों ही भूखंडों पर कुल 11,000 पौधे लगाये गये थे. इनमें पौधे 8718 जीवित बचे हैं. संझौली पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर 400 पौधे लगाये गये, जिनमें से 308 पौधे जीवित हैं, जबकि निजी भूखंड पर 1200 पौधे लगाये गये. इसमें 1100 पौधे जीवित हैं. अमेठी पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर 1800 लगाये गये, जिसमें 1260 जीवित हैं, जबकि निजी भूखंड पर एक भी पौधा नहीं लगाया गया.

निजी भूखंडों पर भी लगाये जाते हैं पौधे

करमैनी पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर मात्र 400 पौधे लगाये गये. इसमें से 360 पौधे जीवित हैं . उदयपुर पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर 2214 लगे, जिनमें 1540 जीवित बचे हैं. मझौली पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर 2400 में 1920 पौधे जीवित हैं. चांदी इंग्लिश पंचायत अंतर्गत सार्वजनिक भूखंड पर 2400 में 2130 पौधे जिंदा हैं, जबकि निजी भूखंड पर 200 में मात्र 100 पौधे जीवित हैं. यह कड़ी यह बताने के लिए काफी है कि कुल 11000 पौधों में सार्वजनिक भूखंड पर 9600, जबकि निजी जमीन पर 1400 लगाये गये हैं. इन पौधों में 8718 जीवित हैं. मृत पौधों की संख्या 2282 है. आंकड़े बताते हैं कुल लगाये गये पौधों में से मात्र 79.25 प्रतिशत ही जीवित बचे हैं .

बोले मनरेगा प्रोग्राम पदाधिकारी

प्रोग्राम पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि निजी जमीन पर पौधा लगाने के लिए एक किसान को 200 पौधा दिया जाता है. पौधे देने के पहले किसान से राय ली जाती है कि फलदार, इमारती या सुगंधित पौधे चाहिए. उनके मनपसंद उन्हें पौधा दिया जाता है. 200 पौधे (एक यूनिट) लगाने के लिए 10 कट्ठा जमीन की जरूरत होती है. किसान निजी जमीन पर लगाये गये पौधों की देखरेख व सिंचाई के खुद जिम्मेदार होते हैं. इसके लिए उन्हें तीन साल तक लगातार 21-21 हजार रुपये दिये जाते हैं. इस शर्त के साथ कि 90 प्रतिशत पौधे जीवित रहेंगे. अधिकारी की मानें, तो सार्वजनिक जमीन पर लगाये गये पौधों की देखरेख व सिंचाई करने के लिए एक यूनिट यानी 200 पौधों के लिए दो मनरेगा मजदूरों को रखा जाता है. जिसे 30 दिन काम के बदले 8 दिन की मजदूरी 210 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दी जाती है. साथ ही 30 दिन के बाद मजदूरों को बदल-बदल कर काम पर रखा जाता है.

क्यों मरते हैं पौधे

मनरेगा कर्मियों की मानें, तो कुछ पौधे सिंचाई के अभाव में मर जाते हैं, तो कुछ को जानवर खा जाते हैं. वहीं कुछ पौधे किसानों द्वारा पराली जलाने के दौरान जल जाते हैं, जबकि सरकारी कर्मी, कृषि वैज्ञानिक, समाजसेवी, पराली नहीं जलाने के लिए किसानों को समय-समय पर जागरूक करते रहते हैं. फिर भी कुछ किसान पराली जलाने से परहेज नहीं करते हैं. इसका नतीजा होता है कि प्रत्येक वर्ष लाखों पौधे आग की लपेट में जल कर मर जाते हैं.

मनरेगा के तहत लगाये जाने वाले पौधों के बीच की दूरी आपस में लगभग10 फुट होती है. पौधों का रखरखाव एवं सिंचाई करने के लिए पांच साल तक मजदूर नियुक्त किया जाता है, जो पौधे की देखरेख व सिंचाई करते रहता है. बावजूद इसके पौधे सूख हैं, तो इसका कारण पता किया जायेगा. अमित कुमार, पीआरएस, मनरेगा. Prabhat Khabar App: देश-दुनिया, बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस अपडेट, क्रिकेट की ताजा खबरे पढे यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए प्रभात खबर ऐप.

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