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मजदूरों के अभाव में खराब हो रही तैयार धान की फसल, कटाई पूरी नहीं होने से प्रखंड में खरीद भी प्रभावित

Bihar News झुलसा और कजरिया जैसी सामान्य बीमारियों के साथ ही धान के खेतों में फसल गिर जाने आदि की समस्या भी देखने को मिल रही है. किसान चाह कर भी धान की कटाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
बिहार में मजदूरों के अभाव में खराब हो रही तैयार धान की फसल
बिहार में मजदूरों के अभाव में खराब हो रही तैयार धान की फसल
फाइल फोटो.

Bihar News: रोहतास के चेनारी प्रखंड क्षेत्र में खेतों में लगी धान की फसल अब खराब होने के कगार पर पहुंचती जा रही है. मजदूरों के अभाव में धनकटनी नहीं हो पा रही है. खेतों में पक कर तैयार धान की फसल की बालियां सूखने लगी हैं. वर्तमान में स्थिति यह है कि धान की फसल में कई प्रकार के कीटों का प्रकोप होता जा रहा है. झुलसा और कजरिया जैसी सामान्य बीमारियों के साथ ही धान के खेतों में फसल गिर जाने आदि की समस्या भी देखने को मिल रही है. किसान चाह कर भी धान की कटाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं. अपनी फसल बर्बाद होता देख उनमें गहरी निराशा है. धान की कटाई पूरी तरह नहीं हो पाने के कारण प्रखंड में खरीद का काम भी प्रभावित है.

रोग की चपेट में आ रही है धान की फसल

समय से अधिक अवधि तक खेतों में धान की फसल लगी रहने से इनमें कीटों, कजरी रोग और पौधे के झुलसने के मामले सामने आ रहे हैं. सबसे दिक्कत वाली स्थिति तो यह है कि इन सारी परेशानियों से निजात का एक मात्र उपाय फसल की कटनी ही है. हालांकि, हार्वेस्टर से धान की फसल की कटाई का विकल्प है, लेकिन अभी खेतों में नमी बनी रहने के कारण इसका उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है. आने वाले 10 दिनों में थोड़ी स्थिति बदल सकती है. लेकिन तब तक बड़ी मात्रा में धान की बालियां खखरी हो चुकी होंगी. यह सीधा-सीधा किसानों का नुकसान होगा.

मजदूरों का पलायन पड़ रहा है भारी

बरसात के सीजन में मजदूरों के प्रखंड में मौजूद रहने के कारण धान की रोपनी तो ठीक-ठाक तरीके से हो जाती है, लेकिन कटाई से पूर्व ही प्रखंड के अधिकतर मजदूर दूसरे प्रदेश के लिए रवाना हो जाते हैं. इस कारण धान कटाई का काम बुरी तरह प्रभावित है. स्थानीय स्तर पर लगातार मजदूरी नहीं मिल पाने के कारण क्षेत्र के ज्यादातर मजदूर दूसरे प्रदेशों के ईंट-भट्ठों पर दशहरे से लेकर दीपावली और छठ के बीच पलायन कर जाते हैं. मजदूरों के सामने भी पेट पालने की मजबूरी रहती है.

क्या कहते हैं कृषि सलाहकार

ऐसी स्थिति में किसान धान को ऊपर से काट लें और बाद में खूंटी का प्रबंधन कर लें. धान पकने के समय आयी बारिश के कारण दिक्कत जरूर है, लेकिन यदि किसान खेतों में जमा पानी को निकालने की व्यवस्था कर लें, तो कटनी हो सकती हैं. वैसे अभी 28 से 30 डिग्री तक तापमान सामान्य रूप से बन रहा है. ऐसे में गेहूं की बुआई के लिए किसान 20 से 25 डिग्री तापमान का इंतजार कर सकते हैं. तब तक धान की कटनी भी संभव हो सकती है.

ददन सिंह, कृषि सलाहकार, चेनारी

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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Published Date

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