अपनी जमीन रहते किसान खुद को घोषित कर रहे गैर रैयती
रैयती से अधिक गैर रैयती किसानों का पैक्स ने लिया धान
नोखा : गैर रैयती किसानों से धान लेने वाले कदवां पैक्स की जांच होगी. डीएम के निर्देश पर बीएओ इसकी जांच करेंगे. जांच पूरी होने तक पैक्स की खरीदी पर रोक लगा दी गयी है. बीसीओ अजय कुमार ने बताया कि कदवां पैक्स में अधिकतर गैर रैयती किसानों से धान खरीद की शिकायात लोगों ने डीएम से की है. उन्होंने पैक्स के माध्यम से खरीद पर रोक लगाते हुए, उसके जांच के आदेश दिये हैं.
गौरतलब है कि सरकार ने गैर रैयती किसानों के हित में नियम बनाया, तो उसका बेजा फायदा पैक्स व व्यापार मंडल उठाने लगे. आलम यह हुआ कि अपनी जमीन रहते किसान अपने को गैर रैयती घोषित करने लगे. इसका लाभ कई पैक्सों ने उठाया व अपनी जमीन में खेती करनेवाले किसानों को गैर रैयती दिखा भारी मात्रा में धान खरीद डाला. किसान संजय कुमार ने बताया कि दादा-परदादा के समय से जमीन की रसीद कट रही है. अपने नाम से रसीद के लिए वंशावली व एलपीसी बनवाने में काफी झंझट झेलने से आसान रास्ता अपने को गैर रैयती घोषित करना ही लोगों को अच्छा लग रहा है.
प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी केवल 150 क्विंटल धान की ही खरीद हो सकती है, तो इतने धान के लिए उतना झंझट कौन मोल ले.
अपनी जमीनवाले भी बन रहे बटाईदार: शेखपुरवा के किसान धीरेंद्र सिंह का 18 बिगहा जमीन है लेकिन गैर रैयत बन ऑनलाइन होकर अपना धान बेचा है. नोनासारी पंचायत में 5152 क्विंटल, उत्तरी बरांव में 4410, मैडिहां में 2310, चनकी में 4224, घोसियां में 4050, कदवां में 6600, कुरी में 4525, नगर पंचायत में 3725, सिसीरता में 4746, व्यापार मंडल में 9181 क्विंटल धान की खरीदारी हुई है. इसमें गैर रैयती करीब 608 व रैयती करीब 203 किसानों के धान हैं.
जिला सहाकारिता पदाधिकारी निकेश कुमार ने बताया कि गैर रैयती किसानों से धान की ज्यादा खरीदारी की गयी है. इसका बीसीओ से सत्यापन कराया जा रहा है. जांच में स्थिति स्पष्ट हो जायेगी. इधर, कदवां के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया की हमें क्या पता कि कौन रैयती है और कौन गैर रैयती. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के आधार पर धान लिया गया है.
