विकास का नामोनिशान नहीं, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
गली-नाली व सड़क की स्थिति बदहाल
अंधेरे में डूबा रहता है पूरा वार्ड
पेयजल व शौचालय का काम अधूरा
सासाराम नगर : शहर के वार्ड नंबर 13 के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. इस वार्ड में विकास कार्य का नामोनिशान नहीं है. हर तरफ गंदगी व कूड़े का ढेर बजबजाती नालियां ही दिखाई पड़ती है. अभी अभी बरसात खत्म हुआ है तो लोगों को थोड़ी राहत मिली है. वार्ड में करीब चार माह तक दो से तीन फुट तक पानी जमा रहता है़ वार्ड के लोग इसी गंदे पानी से हो कर आते जाते थे. बरसात खत्म हुआ, तो नालियों का कीचड़ सड़क पर पसरा है.
सदर अस्पताल से पूरब दिशा का तो और हाल खराब है. पहले इस वार्ड के नालियों का पानी सदर अस्पताल के खाली पड़े जमीन से निकल जाता था. विगत तीन वर्षों से अस्पताल परिसर को भर कर उसकी घेराबंदी कर दी गयी है. इससे पानी की निकासी बंद हो गयी. पानी निकासी के लिए दूसरी व्यवस्था नहीं की गयी है़ इसका खामियाजा वार्ड की जनता भुगत रही है. अस्पताल रोड से लेकर शेरगंज स्थित सुखा रौजा तक वार्ड 13 का क्षेत्र है. ऐसा कोई गली नहीं जहां नाली का पानी सड़क पर नहीं बहता हो. साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है. वार्ड पार्षद अपने वार्ड में विकास का दावा करते हैं. उनका कहना है कि 30 लाख की योजना से अपने वार्ड में विकास कार्य कराया हूं. लगभग गली नाली लाइट व 20 शौचालय का निर्माण कराया गया है. जो की इतनी कम राशि में यह संभव नहीं है. राशन कार्ड भी आठ सौ लोगों का बना है़
60 लोगों ने शौचालय बनवाने के लिए फाॅर्म भरा है. जो बहुत जल्द स्वीकृत हो काम लगेगा. पेयजल के लिए वार्ड में हाहाकार मचा हुआ है. गरमी में पानी के लिए मारपीट तक हो जाती है. अभी भी कई घरों के लोग खुले में शौच करते हैं. इस वार्ड में 60 लाइट लगाने का दावा किया जा रहा है. जबकि, वार्ड का अधिकतर भाग अंधेरे में डूबा रहता है. वार्ड पार्षद अगर अपने वार्ड में जल निकासी की व्यवस्था कर देते, तो वार्ड की जनता का नाराजगी नहीं झेलनी पड़ती. शहर की बीचों-बीच बसा यह क्षेत्र विकास से कोसों दूर है.
