राजधानी से जुड़ा शहर, पर नहीं रुकी ‘राजधानी’

सासाराम (नगर) : रेलवे की दृष्टिकोण से सासाराम राज्य व देश की राजधानी से तो जुड़ गया, लेकिन यहां राजधानी एक्सप्रेस जैसे महत्वपूर्ण ट्रेन का ठहराव अब तक नहीं हो पाया है. लोगों की मांग घोषणाओं तले दब कर रह गयी है, जबकि स्थानीय सांसद द्वारा राजधानी एक्सप्रेस जैसे कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की ठहराव सुनिश्चित […]

सासाराम (नगर) : रेलवे की दृष्टिकोण से सासाराम राज्य व देश की राजधानी से तो जुड़ गया, लेकिन यहां राजधानी एक्सप्रेस जैसे महत्वपूर्ण ट्रेन का ठहराव अब तक नहीं हो पाया है.

लोगों की मांग घोषणाओं तले दब कर रह गयी है, जबकि स्थानीय सांसद द्वारा राजधानी एक्सप्रेस जैसे कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की ठहराव सुनिश्चित कराने का आश्वासन कई बार दिया गया. 2009 के आम चुनाव में लगातार दूसरी बार सांसद बनी मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष बनने के साथ ही सासाराम रेलवे स्टेशन की समग्र विकास के लिए पहल तो जरूर की.

लेकिन, मंत्रलय द्वारा जितनी भी घोषणाएं की गयी हैं, उनमें से अधिकतर पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ है. वर्ष 2010 में आदर्श स्टेशन के रूप में सासाराम का चुनाव किया गया था.

स्थानीय स्टेशन पर पिछले पांच साल के दौरान जिन ट्रेनों की ठहराव सुनिश्चित हुआ है, उसका श्रेय भले ही कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता सांसद सह लोक सभाध्यक्ष मीरा कुमार को दें, परंतु सामाजिक कार्यकर्ता व आरटीआइ एक्सपर्ट धनंजय खंडेलवाल के संघर्ष को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

बजट में घोषणा के बावजूद सासाराम में मल्टी कॉम्प्लेक्स व ओपीडी का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है. इनके अलावा आरा-भभुआ रोड-मुंडेश्वरी नयी रेल लाइन का प्रस्ताव आठ साल से अधर में है.

इधर, क्षेत्रीय सांसद के प्रयास से सासाराम से पटना व सासाराम से आनंद बिहार (दिल्ली) तक की ट्रेन शुरू हुई है. 2010-2011 में मंत्रलय ने पटना- सासाराम फास्ट पैसेंजर और 2012-2013 में सासाराम-आनंद बिहार (एसी) गरीब रथ का परिचालन शुरू हुआ.

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