नहीं मिल पाती है खपत की सही जानकारी
डेहरी ऑन सोन (सदर) : एक तरफ सरकार जहां बिजली आपूर्ति व रखरखाव को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण विद्युत बोर्ड को प्रतिमाह लाखों का चूना लग रहा है. खपत की जानकारी के लिए बिजली विभाग ने हर ट्रांसफॉर्मर पर मीटर लगा रखे हैं, ताकि बिजली की खपत की सही जानकारी मिल सके. लेकिन, विभागीय उदासीनता के कारण ट्रांसफॉर्मर पर लगे मीटर खराब पड़े हैं व ट्रांसफॉर्मर की शोभा बढ़ा रही हैं.
बिजली चोरी रोकने का प्रयास विफल : बिजली विभाग ने बिजली चोरी रोकने के लिए सभी ट्रांसफॉर्मर पर मीटर लगाये गये थे, ताकि ट्रांसफॉर्मर से उपभोक्ता द्वारा बिजली की खपत की जानकारी मिल सके. उपभोक्ताओं की खपत से उसका मिलान कर चोरी करनेवालों पर कार्रवाई की जा सके. लेकिन, मीटरके खराब रहने से चोरी रोकना तो दूर की बात, खपत की जानकारी भी नहीं मिल रही है.
ट्रांसफॉर्मरों पर क्षमता से अधिक भार : ऐसे सैकड़ों ट्रांसफॉर्मर है, जहां क्षमता से अधिक लोड है. इसके कारण ट्रांसफॉर्मर पर लगाये मीटर जल गये हैं. इसके कारण खपत का आंकलन करना मुश्किल हो गया है.
एक ट्रांसफॉर्मर पर मीटर सहित अन्य उपकरण लगाने में 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है. लेकिन, देखरेख नहीं होने व क्षमता से अधिक लोड होने के कारण ये खराब हैं. इसकी न तो अधिकारियों को चिंता है और न ही कर्मचारियों को. हजारों रूपये खर्च करने के बाद भी अधिकारी मौन हैं.
अधिकारी नहीं देते हैं सूचना : बिजली खपत की जानकारी के लिए ट्रांसफॉर्मर पर लगाया गया विद्युत मीटर के खराब होने सूचना व दुरुस्त कराने का जिम्मा उस क्षेत्र के कनीय अभियंता की है. लेकिन खराब पड़े मीटर की अधिकारी सूचना नहीं देते हैं. इसके कारण मीटर खराब पड़ा रहता है.
बदले जा रहे हैं खराब मीटर : विद्युत कार्यपालक अभियंता विकास प्रसाद सिंह ने बताया कि कुछ जगहों पर ट्रांसफॉर्मर पर लगे विद्युत मीटर खराब हैं. इन मीटरों को बदलने का काम चल रहा है. शीघ्र ही पूरा कर लिया जायेगा.
