डेहरी ऑन सोन (रोहतास) : किसानों की लाइफ लाइन सोन नहरों व वितरणियों में पानी नहीं है. त्राहिमाम संदेश और मैराथन बैठकों में भी ऐसे उपाय नहीं ढूंढे गये, जिससे सोन नद के पानी को समुचित मात्रा में किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा सके. इधर, जल संसाधन विभाग की उस अपील से किसानों के भी हाथ-पांव फूलने लगे हैं, जिसमें ये बातें कहीं गयी हैं कि सोन कमांड क्षेत्र के कृषक लगायी गयी रबी फसलों को बचाने के लिए सिंचाई के अन्य साधनों का भी उपयोग करें.
सोन नद के उपरी जल ग्रहण क्षेत्र रिहंद व वाणसागर जलाशयों से फिलहाल ऐसी आशा भरी उम्मीदें जागती नहीं दिखती, जिससे इंद्रपुरी बराज को समुचित रूप से फिलहाल जरूरत की करीब आठ हजार क्यूसेक पानी मिल सके. सिंचाई विभाग के पास समस्या विकट है कि रबी फसलों के पटवन का जो लक्ष्य दो लाख 38 हजार हेक्टेयर निर्धारित है, उसे कैसे पूरा किया जाये. इन सब के बीच इंद्रपुरी जलाशय के चिर परिचित निर्माण की मांग को बल मिलने लगा है, ताकि पानी की समस्या से निजात मिल सके. विभागीय सूत्रों की मानें तो इस दिशा में पहल भी पुन: एक बार जोर-शोर से शुरू हुई है व शीघ्र ही उच्चस्तरीय बैठक की संभावना है.
मिले पानी से पूरी नहीं होगी जरूरत : जल संसाधन विभाग की मानें तो वाणसागर व रिहंद जलाशयों से इंद्रपुरी बराज को जरूरत का 25 प्रतिशत भी पानी नहीं मिल रहा है. सोमवार को रिहंद से 2269.68 क्यूसेक पानी मिला है, जो नाकाफी है. सोन चैनलों के विभिन्न वितरणियों में जरूरत से काफी कम पानी दिया जा रहा है. इससे किसानों के खेतों की जरूरतें पूरी नहीं हो सकती हैं. बिहिया, काइलवर व करगहर वितरणियों को पानी नहीं मिल रहा, तो वहीं कई सिंचाई चैनलों को बारी-बारी से न्यूनतम पानी की सप्लाइ की जा रही है.
